Jsutice Surya Kant oath ceremony: भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में आज एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। 24 नवंबर 2025 को जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53वें प्रधान न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के सभी वरिष्ठ न्यायाधीशों सहित ब्राज़ील, भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका के न्यायाधीश भी मौजूद रहे। यह पहली बार था जब किसी CJI के शपथ ग्रहण में इतने देशों का न्यायिक प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ—जो भारत की बढ़ती न्यायिक प्रतिष्ठा और वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।

भावुक पल: माता-पिता के चरण स्पर्श, पूर्व CJI को गले लगाया

शपथ ग्रहण समारोह में जस्टिस सूर्यकांत ने अपने माता-पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने पूर्व CJI बी.आर. गवई को गले लगाकर सम्मान प्रकट किया। यह दृश्य समारोह का सबसे भावुक क्षण साबित हुआ।

हिसार से सुप्रीम कोर्ट का सफर: एक प्रेरणादायक कहानी

हरियाणा के छोटे से शहर हिसार से निकलकर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुँचना जस्टिस सूर्यकांत के संघर्ष, अनुशासन और प्रतिभा की मिसाल है। एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले सूर्यकांत की वकालत की शुरुआत साधारण थी, लेकिन उनकी कानूनी समझ, संतुलित दृष्टिकोण और निडर फैसलों ने उन्हें शीर्ष तक पहुंचाया।

महत्वपूर्ण फैसलों में निभाई अहम भूमिका

जस्टिस सूर्यकांत ने अपने करियर में कई बड़े और संवैधानिक महत्व के मामलों में निर्णायक भूमिका निभाई है। इनमें शामिल हैं—

  • अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से जुड़े फैसले

  • पेगासस स्पाइवेयर जांच

  • मानवाधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े कई ऐतिहासिक आदेश

उनके फैसले न केवल संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप रहे, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता को मजबूत करने वाले भी साबित हुए।

उम्मीदें और चुनौतियाँ

नए CJI के रूप में उनके सामने लंबित मामलों का बोझ कम करने, न्यायिक पारदर्शिता बढ़ाने, तकनीक आधारित न्याय प्रणाली को आगे बढ़ाने और अदालतों को आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाने जैसी अहम चुनौतियाँ हैं। जस्टिस सूर्यकांत का यह नया दायित्व भारतीय न्यायपालिका को आधुनिक और अधिक जनोन्मुख बनाने की दिशा में एक नई शुरुआत माना जा रहा है।

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