Parliament Winter Session: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव सुधारों को लेकर विपक्षी दलों के विरोध ने संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन भी कार्यवाही को प्रभावित कर दिया। मंगलवार को लोकसभा और राज्यसभा — दोनों सदनों में जोरदार हंगामा हुआ, जिसके चलते कार्यवाही दोपहर तक स्थगित कर दी गई।

लोकसभा में भारी हंगामा, कार्यवाही स्थगित

लोकसभा की बैठक 11 बजे शुरू होते ही विपक्षी दलों के सांसद SIR के मुद्दे पर नारेबाजी करते हुए आसन के समीप पहुंच गए। कांग्रेस और अन्य विपक्षी सदस्यों ने चुनाव सुधार और SIR पर तत्काल चर्चा की मांग की।

प्रश्नकाल बाधित, अध्यक्ष ने जताई नाराजगी

अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से शांत रहने और अपने स्थान पर बैठने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा।
उन्होंने कहा “संसद में असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन मर्यादा और शालीनता आवश्यक है। जिस भाषा और आचरण का उपयोग कुछ सदस्य सदन और बाहर कर रहे हैं, वह उचित नहीं है।” हंगामे के बीच भी बीजेपी सांसदों द्वारा उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से जुड़े पूरक प्रश्न पूछे गए, लेकिन विपक्ष नारेबाजी करता रहा। स्थगन के बाद जब 12 बजे बैठक पुनः शुरू हुई, तो हंगामा और तेज हो गया।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू का जवाब

रीजीजू ने विपक्ष से कहा—

  • “एक मुद्दे के नाम पर संसद को ठप करना ठीक नहीं।”

  • “चुनाव में हार-जीत होती है, हार की बौखलाहट में संसद में गुस्सा निकालना उचित नहीं।”

  • “हम हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं, बातचीत से रास्ता निकलेगा।”

लेकिन विपक्ष नहीं माना और नारेबाजी जारी रही।
आखिरकार, पीठासीन सभापति पी.सी. मोहन ने कार्यवाही 12:10 बजे से 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

राज्यसभा में भी विपक्ष का हंगामा, 20 नोटिस खारिज

ऊपरी सदन में भी SIR और चुनाव सुधारों को लेकर विपक्ष आक्रामक नजर आया।
सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने बताया कि उन्हें नियम 267 के तहत कार्य स्थगन के 20 नोटिस मिले, लेकिन उन्हें नियमों के अनुरूप न मानते हुए खारिज कर दिया गया।

विपक्ष की कड़ी आपत्ति

नोटिस खारिज होने के बाद RJD के प्रो. मनोज झा, कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, DMK के तिरुचि शिवा सहित कई सदस्यों ने चर्चा की मांग को लेकर जोरदार विरोध जताया। खरगे ने कहा कि सभापति ने न तो नोटिस खारिज करने का कारण बताया, न ही नोटिस देने वाले सदस्यों के नाम पढ़े, जो सदन की परंपरा के विपरीत है। हंगामे के बीच सभापति ने शून्यकाल जारी रखने की कोशिश की, लेकिन विरोध न रुकने पर राज्यसभा की कार्यवाही भी 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

SIR पर विपक्ष क्यों आक्रामक है?

विपक्ष का आरोप है कि:

  • SIR की प्रक्रिया जल्दबाजी में चलाई जा रही है

  • मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर वोट कटने का खतरा

  • चुनाव सुधारों पर सरकार विपक्ष को विश्वास में नहीं ले रही

सरकार का कहना है कि:

  • SIR नियमित प्रक्रिया है

  • पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास

  • हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है

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