लखनऊ। जहरीले कफ सिरप कांड में एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। कफ सिरप की सप्लाई कर जुटाई गयी काली कमाई झारखंड में खनन के काम में निवेश होने वाली थी। शुभम जायवाल खनन के कारोबार से जुडे बाहुबलियों और माफियाओं से नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा था। इसी के जरिए वह एक मंत्री के संपर्क में आया और उन्होंने उसे बडा काम दिलवाने का आश्वासन दिया था।

सूत्रों की मानें तो इसी वजह से शुभम को एमएलसी बनाने का आश्वासन दिया गया था और एक बड़े राजनेता से मुलाकात कराकर उसे लैंड क्रूजर गाड़ी भेंट की गई थी। दरअसल, पहले से शराब का कारोबार करने की वजह से बाहुबलियों के संपर्क में आ चुका था। कफ सिरप की तस्करी के धंधे में आने के बाद उसकी दौलत के साथ पूर्वाचल के अंडरवर्ल्ड में भी उसका प्रभाव बढ़ता चला गया। जानकारी आ रही है कि शुभम, अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह को दुबई ले जाने वाले विकास सिंह विक्की को एक पूर्व ब्यूरोक्रेट ने ब्लॉक प्रमुख बनाने का आश्वासन दिया था।

फर्जी फर्मों का खंगाला जा रहा रिकार्ड

धनंजय सिंह के करीबी शुभम जायसवाल, अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह ने नशीले कफ सिरप की तस्करी करने के लिए पहले फर्जी फर्मे बनाई थीं। उनकी ये चूक गले की फांस बन चुकी है। एसटीएफ और इंडी उनकी फर्जी फर्मों का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं ताकि कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके। तीनों आरोपियों ने ही प्रदेश में नशीले कफ सिरप की तस्करी का सिंडीकेट बनाया था, जिसमें पूर्वाचल के कई बाहुबली जुड़ते चले गए।

16 फर्म संचालकों के 30 खाते फ्रीज

एसआईटी की एक-एक टीम आसपास के छह जनपदों में भेजी गई। जनपद में 18 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हुए हैं, जो 45.06 करोड़ के खेल से जुड़े हैं। पिछले तीन दिनों में 16 संचालकों के 30 बैंक खाते फ्रीज किए हैं। रिमांड पर भोला ने बताया कि पूरे मामले में वाराणसी के चार्टर्ड अकाउंटेंट विष्णु अग्रवाल की भूमिका अहम है। सीए विष्णु अग्रवाल ही शुभम के धंधे का पूरा हिसाब रखता था। अब विष्णु की तलाश की जा रही है।

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