UP NEWS: उत्तर प्रदेश में कोडीन आधारित कफ सिरप की अवैध तस्करी में शामिल बड़े सिंडिकेट पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने लखनऊ सहित छह शहरों में करीब 25 ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी की है। इस कार्रवाई में लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी स्थित निलंबित एसटीएफ सिपाही आलोक प्रताप सिंह की आलीशान कोठी भी शामिल रही।

निलंबित सिपाही आलोक प्रताप की कोठी पर ईडी का छापा

ईडी की टीम ने आलोक प्रताप सिंह के घर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ अपने कब्जे में लिए हैं। इसमें बैंक डिटेल्स, डिजिटल डिवाइस और हवाला से जुड़े रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है। आलोक प्रताप सिंह को एसटीएफ ने पहले ही सेवा से बर्खास्त कर गिरफ्तार कर रखा है। माना जा रहा है कि वह इस पूरे ड्रग सिंडिकेट का एक बड़ा ऑपरेटर था।

6 शहरों में बड़ी छापेमारी

ईडी ने जिस स्तर पर कार्रवाई की है, वह इस नेटवर्क की गहराई और बड़े पैमाने पर फैले कारोबार को उजागर करता है।
छापेमारी जिन शहरों में हुई:

  • लखनऊ

  • वाराणसी

  • सहारनपुर

  • जौनपुर

  • रांची

  • अहमदाबाद

पुलिस ने दो सहयोगियों को किया गिरफ्तार

इस मामले में एक दिन पहले ही पुलिस ने भगोड़े दीपक मनवानी के दो साथियों—सूरज मिश्रा और प्रीतम सिंह—को गिरफ्तार किया है। दीपक मनवानी को 11 अक्टूबर को पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त कार्रवाई में भारी मात्रा में कोडीन सिरप, टैबलेट, कैप्सूल और इंजेक्शन के साथ पकड़ा गया था। एसीपी कृष्णा नगर रजनीश वर्मा के अनुसार, पूछताछ में मनवानी ने स्वीकार किया था कि सूरज और प्रीतम अवैध दवाएं खरीदकर नशेड़ियों को बेचते थे। गिरोह का एक और सदस्य अरुष सक्सेना अभी फरार है।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

  • सूरज मिश्रा: सीतापुर के अटरिया सदनपुर का निवासी, ‘न्यू मंगलम आयुर्वेदिक’ नाम की दवा एजेंसी चलाता है।

  • प्रीतम सिंह: बहराइच के बड़ी राजा गांव का निवासी, लखनऊ के पुरानिया में पारिवारिक रेस्टोरेंट में काम करता है।

तेजी से फैल रहा था अवैध कोडीन नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार, कोडीन आधारित कफ सिरप की अवैध सप्लाई का यह नेटवर्क यूपी के कई जिलों में सक्रिय था। इस सप्लाई चेन का नेटवर्क न सिर्फ प्रदेश में, बल्कि भारत के कई राज्यों और विदेशों तक फैला हुआ था। इस रैकेट का वार्षिक कारोबार सैकड़ों करोड़ रुपये में बताया जा रहा है।

राजनीतिक हलचल भी तेज

इस मामले के उजागर होने के बाद राज्य की सियासत भी गर्म हो गई है। विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी, सरकार पर लगातार हमलावर है। वहीं, सरकार ने इस पूरे मामले में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाते हुए कहा है कि ड्रग सिंडिकेट को पूरी तरह जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा।

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