लखनऊ: कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने उत्तर प्रदेश में डेढ़ साल से अल्पसंख्यक आयोग में अध्यक्ष पद के खाली रखे जाने की निंदा की है. उन्होंने तत्काल आयोग को सक्रिय करने की मांग की है.

जारी प्रेस विज्ञप्ति में शाहनवाज़ आलम ने कहा कि अल्पसंख्यक आयोग एक ऐसी संस्था है जिसमे अल्पसंख्यक समाज के पीड़ित व्यक्ति न्याय के लिए जा सकते हैं. इसमें अधिकतर पुलिस उत्पीड़न के मुद्दे होते हैं. लेकिन ऐसा लगता है कि पुलिस को अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा की खुली छूट देने के बाद उन्हें सज़ा से बचाने के लिए ही योगी सरकार ने अल्पसंख्यक आयोग को मृतप्राय बना दिया है. ताकि पीड़ित व्यक्ति पुलिस की शिकायत न कर पाएं. वहीं ज़्यादातर दूसरी शिकायतें ज़मीन पर अवैध क़ब्ज़े की होती हैं. ऐसा लगता है कि अल्पसंख्यक समाज के व्यक्तियों की ज़मीनों पर भाजपा से जुड़े भू माफियाओं के क़ब्ज़े को प्रोत्साहित करने के लिए भी आयोग में अध्यक्ष पद पर कोई नियुक्ति नहीं की गई है.

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की गारंटी संविधान देता है. इसलिए संविधान की अभिरक्षक संस्था होने के कारण सुप्रीम कोर्ट की ज़िम्मेदारी है कि वो उत्तर प्रदेश में 27 जून 2024 यानी पिछले डेढ़ साल से निष्क्रिय रखे गए आयोग की ख़बरों पर स्वतः संज्ञान लेकर राज्य सरकार को नोटिस भेजे.

उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय खासकर मुसलमान आर्थिक और सामाजिक तौर पर कमज़ोर होने के कारण न्यायपालिका में न्याय मांगने नहीं जा पाते. ऐसे में अल्पसंख्यक आयोग उनके लिए न्याय पाने का ज़्यादा आसान और सस्ता माध्यम होता है. इसलिए आयोग को निष्क्रिय किया जाना अल्पसंख्यकों को न्याय पाने से वंचित किया जाना है. उन्होंने कहा कि न्याय पाने का अधिकार नागरिक को संविधान द्वारा दिया गया मौलिक अधिकार है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट को उसके इस अधिकार की रक्षा करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को उचित निर्देश देने की ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए।

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