नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रिश्तों को लेकर लंबे समय से जारी बहस पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट और दो टूक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि RSS किसी भी राजनीतिक दल का रिमोट कंट्रोल नहीं है और संघ का राजनीति से कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं होता।

“संघ समाज निर्माण का काम करता है”

मोहन भागवत ने कहा कि RSS एक सांस्कृतिक–सामाजिक संगठन है, जिसका उद्देश्य राष्ट्र निर्माण, समाज सेवा और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा-“RSS का काम किसी सरकार या पार्टी को चलाना नहीं है। राजनीति अपना काम खुद तय करती है।”

विपक्ष के आरोपों पर करारा जवाब

अक्सर विपक्षी दल यह आरोप लगाते रहे हैं कि BJP, RSS के इशारों पर काम करती है। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भागवत ने कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि—

  • RSS कोई आदेश नहीं देता

  • राजनीतिक फैसले पार्टी और सरकार खुद लेती है

  • संघ केवल वैचारिक और नैतिक दिशा देता है

BJP और RSS के रिश्तों पर क्या बोले भागवत?

RSS प्रमुख ने माना कि संघ और BJP के बीच वैचारिक समानता हो सकती है, लेकिन इसे नियंत्रण या हस्तक्षेप कहना गलत है। उन्होंने कहा कि “संघ समाज में सोच विकसित करता है, राजनीति उस सोच को कैसे अपनाए—यह उनका निर्णय होता है।”

बयान के राजनीतिक मायने

मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब—

  • संघ–BJP संबंधों पर चर्चाएं तेज हैं

  • विपक्ष लगातार ‘रिमोट कंट्रोल’ का आरोप लगा रहा है

  • चुनावी माहौल में RSS की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं

राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बयान RSS की स्वतंत्र पहचान को रेखांकित करने और राजनीतिक विवादों से दूरी बनाने की कोशिश है।

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