लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की दुद्धी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक विजय सिंह गोंड का गुरुवार को लखनऊ स्थित संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और इलाज के लिए एसजीपीजीआई में भर्ती थे। संस्थान की जनसंपर्क अधिकारी कुसुम यादव के अनुसार, मल्टी ऑर्गन फेल्योर के कारण उनका निधन हुआ। विधायक के निधन की खबर मिलते ही सोनभद्र समेत आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरा दुख है।
आदिवासी राजनीति के ‘पितामह’ थे विजय सिंह गोंड
दुद्धी विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित और आदिवासी बहुल क्षेत्र है। विजय सिंह गोंड को पूर्वांचल की आदिवासी राजनीति का ‘पितामह’ माना जाता था। उन्होंने इस क्षेत्र का सात बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया और आदिवासी समाज की आवाज को मजबूती से सदन तक पहुंचाया।
चुनावी सफर रहा प्रभावशाली
वर्ष 2024 के उपचुनाव में विजय सिंह गोंड ने भाजपा प्रत्याशी श्रवण गोंड को 3160 मतों से पराजित कर जीत दर्ज की थी। इससे पहले 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने दुद्धी सीट से रामदुलार गोंड को 6297 मतों के अंतर से हराया था। वे सपा सरकार में मंत्री भी रह चुके थे और पार्टी संगठन में उनका खासा प्रभाव माना जाता था।
संघर्षों से भरा रहा राजनीतिक जीवन
विजय सिंह गोंड का राजनीतिक जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद राजनीति में लंबा और प्रभावशाली सफर तय किया। वर्ष 1979 में वह वनवासी सेवा आश्रम में मात्र 200 रुपये मासिक मानदेय पर कार्यरत थे। इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा का चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा। आदिवासी हितों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुद्धी और ओबरा विधानसभा सीटों को अनुसूचित जनजाति घोषित कराने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी।
शोक संदेशों का तांता
विधायक के निधन पर राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें एक संघर्षशील नेता और आदिवासी समाज के सच्चे हितैषी के रूप में याद किया।
