नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में सियासी सरगर्मी इस समय चरम पर है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच जारी टकराव अब कोलकाता की सड़कों से निकलकर सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय तक पहुंच गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कोलकाता में हुई छापेमारी के विरोध में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 8 दिग्गज सांसदों ने गृह मंत्रालय के बाहर धरना देकर केंद्र सरकार को खुली चुनौती दी है। TMC का आरोप है कि केंद्र सरकार 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष को कमजोर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।

शाह के दरवाज़े पर TMC के दिग्गज

गुरुवार रात से ही दिल्ली की सियासत में हलचल तेज हो गई थी, लेकिन शुक्रवार सुबह होते-होते गृह मंत्रालय के बाहर का माहौल पूरी तरह बदल गया। धरने पर बैठे सांसदों में TMC के कई प्रमुख और मुखर चेहरे शामिल हैं, जिनमें—

  • डेरेक ओ ब्रायन

  • महुआ मोइत्रा

  • साकेत गोखले

  • शताब्दी रॉय

  • बापी हलदर

  • प्रतिमा मंडल

  • कीर्ति आज़ाद

  • डॉ. शर्मिला सरकार

जैसे नाम शामिल हैं। इन सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर ही अपना राजनीतिक डेरा डाल दिया है। सांसदों की साफ मांग है कि केंद्रीय एजेंसियों की कथित “राजनैतिक कार्रवाई” तत्काल रोकी जाए। उनका कहना है कि जब तक उनकी बात नहीं सुनी जाएगी, तब तक यह धरना जारी रहेगा।

I-PAC पर ED रेड बनी टकराव की जड़

इस पूरे राजनीतिक तूफान की जड़ कोलकाता में हुई वह ED छापेमारी है, जहां जांच एजेंसी ने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर रेड की। I-PAC वही कंपनी है जो TMC के लिए चुनावी रणनीति तैयार करती है—चाहे उम्मीदवारों का चयन हो या सोशल मीडिया कैंपेन।

छापेमारी की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गईं और ED पर गंभीर आरोप लगाए। ममता ने दावा किया कि “जांच के नाम पर हमारे उम्मीदवारों की गुप्त सूची और चुनावी डेटा चुराने की कोशिश की जा रही है।” TMC का कहना है कि यह रेड किसी घोटाले की जांच नहीं, बल्कि विपक्षी पार्टी की चुनावी रणनीति को ‘हैक’ करने की साजिश है।

दिल्ली से तय होगी बंगाल की सियासी जंग?

TMC सांसदों के इस आक्रामक विरोध ने केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के रिश्तों में एक नया तनाव पैदा कर दिया है। एक ओर ममता बनर्जी बंगाल की सड़कों पर मार्च कर रही हैं, तो दूसरी ओर उनके सांसद दिल्ली में गृह मंत्रालय को घेर रहे हैं। बीजेपी ने इस पूरे घटनाक्रम को भ्रष्टाचार की जांच से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है, जबकि TMC इसे लोकतंत्र और संघीय ढांचे की रक्षा की लड़ाई करार दे रही है। इस बीच सांसदों को हिरासत में लिए जाने की खबरों से संकेत साफ हैं कि यह सियासी गतिरोध जल्द खत्म होने वाला नहीं है। दिल्ली के दिल में चल रहा यह धरना आने वाले दिनों में और उग्र रूप ले सकता है, जिससे 2026 के बंगाल चुनाव से पहले देश की राजनीति पूरी तरह ध्रुवीकृत होने की आशंका बढ़ गई है।

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