Lucknow कफ सिरप केस: उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी प्रकरण में जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य सरकार के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब तक इस मामले में बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की कथित संपत्तियों को जब्त नहीं कर सके हैं।

जानकारी के अनुसार, सुल्तानपुर रोड स्थित आलोक की आलीशान कोठी सहित अन्य संपत्तियों पर अब तक कुर्की की कार्रवाई नहीं हो पाई है। वहीं उसके करीबी बताए जा रहे अमित सिंह टाटा की संपत्तियों की जांच भी निर्णायक परिणाम तक नहीं पहुंच सकी है। अधिकारियों के दावों के बावजूद कार्रवाई में देरी चर्चा का विषय बनी हुई है।

इस प्रकरण में पहले वाराणसी में मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल और उसके परिजनों की 200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों पर एजेंसियों ने कार्रवाई की थी। लेकिन आलोक सिंह पर समान स्तर की कार्रवाई न होने से जांच की दिशा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, आलोक को कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का करीबी माना जाता रहा है, और इसी वजह से कार्रवाई में सुस्ती की चर्चा हो रही है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इधर, इस मामले में एक अन्य आरोपी अमित यादव को एसटीएफ ने वाराणसी से गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि उसे रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ की जाएगी। अमित यादव पर लखनऊ और वाराणसी में कई मुकदमे दर्ज हैं और उस पर कफ सिरप की बड़ी खेप की तस्करी में शामिल होने का आरोप है।

जांच एजेंसियां दावा कर रही हैं कि मामले की परतें लगातार खुल रही हैं और जल्द ही अन्य आरोपियों पर भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। वहीं विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से निष्पक्ष जांच और सभी आरोपियों पर समान कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। फिलहाल, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियां बर्खास्त सिपाही की संपत्तियों के मामले में आगे क्या कदम उठाती हैं और क्या इस मामले में कथित प्रभावशाली संबंधों की जांच भी की जाएगी।

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