RSS: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की लगातार राजनीतिक मुलाकातों ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट के बाद भागवत ने राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्रियों—केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक—से भी अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों को औपचारिक शिष्टाचार बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके मायने तलाशे जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, संघ प्रमुख ने दोनों डिप्टी सीएम से गुरुवार सुबह संक्षिप्त बातचीत की। इससे पहले बुधवार रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत के बीच राजधानी स्थित संघ कार्यालय परिसर में करीब आधे घंटे से अधिक समय तक एकांत में चर्चा हुई थी। बैठक बंद कमरे में हुई, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला।
प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल की चर्चाओं के बीच इन मुलाकातों को अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब शीर्ष स्तर पर इस तरह की लगातार बैठकें होती हैं, तो उन्हें सामान्य शिष्टाचार भर मान लेना आसान नहीं होता। खासतौर पर तब, जब राज्य में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हों।
मोहन भागवत का हालिया दौरा दो दिवसीय रहा। इस दौरान उन्होंने संगठन से जुड़े कार्यक्रमों में भी भाग लिया। बीते कुछ समय में संघ नेतृत्व की उत्तर प्रदेश में बढ़ती सक्रियता को 2027 की चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि चुनावी रणनीति और संगठनात्मक समन्वय को लेकर संवाद का दौर तेज हो सकता है। हालांकि, सरकार या संघ की ओर से इन बैठकों के राजनीतिक अर्थों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। फिर भी, सत्ता पक्ष और संगठन के बीच समन्वय को लेकर चर्चाएं जारी हैं। प्रदेश की राजनीति में आने वाले महीनों में क्या बदलाव देखने को मिलेंगे, यह तो समय बताएगा, लेकिन फिलहाल लखनऊ में हुई इन मुलाकातों ने सियासी तापमान जरूर बढ़ा दिया है।
