India to Join Pax Silica: भारत आज औपचारिक रूप से अमेरिका की अगुवाई वाली ‘पैक्स सिलिका’ पहल का हिस्सा बन गया है। यह पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सुरक्षित विकास और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती पर केंद्रित है। दिल्ली में आयोजित ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान इस कदम की घोषणा की गई।

क्या है ‘पैक्स सिलिका’?
‘पैक्स सिलिका’ अमेरिकी विदेश विभाग की एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर उभरती तकनीकों—खासकर एआई—को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद ढंग से विकसित करना है। इसके साथ ही, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और अन्य रणनीतिक संसाधनों की सप्लाई चेन को अधिक लचीला और सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया है। पहल का मानना है कि मजबूत आपूर्ति तंत्र आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा की बुनियाद है, जबकि एआई आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास का प्रमुख इंजन बनेगा।
किन देशों की भागीदारी?
इस पहल से ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, यूएई, सिंगापुर, इजराइल, कतर और ग्रीस जैसे देश जुड़ चुके हैं। कनाडा, यूरोपीय संघ, नीदरलैंड्स और ताइवान सहित कुछ अन्य अर्थव्यवस्थाएं साझेदार के रूप में सहयोग कर रही हैं। भारत के शामिल होने से इस मंच को एशिया और ग्लोबल साउथ में अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत-अमेरिका तकनीकी रिश्तों को नई दिशा
भारत के इस निर्णय को दोनों देशों के बीच बढ़ते तकनीकी सहयोग के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इन दिनों भारत दौरे पर हैं और एआई से जुड़े निर्यात कार्यक्रमों के नए चरण पर भी चर्चा हो रही है। इससे सेमीकंडक्टर, क्लाउड कंप्यूटिंग, डाटा सुरक्षा और उन्नत अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में संयुक्त पहल तेज हो सकती है।
खनिज और सप्लाई चेन पर फोकस
हाल के महीनों में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति कुछ सीमित देशों में केंद्रित होने को लेकर चिंता जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति बाधित होती है तो तकनीकी उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में बहुपक्षीय सहयोग के जरिए सप्लाई चेन को विविध और सुरक्षित बनाना समय की जरूरत है।
भारत की रणनीतिक सोच
भारत खुद को एआई गवर्नेंस के क्षेत्र में ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज के रूप में स्थापित करना चाहता है। ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होकर भारत न केवल तकनीकी निवेश और नवाचार को बढ़ावा देगा, बल्कि नियम-आधारित, जिम्मेदार और समावेशी एआई ढांचे के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेगा।विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देने, रणनीतिक उद्योगों को सुरक्षा प्रदान करने और वैश्विक तकनीकी मानकों के निर्धारण में प्रभाव बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
