KGMU controversy: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) परिसर में स्थित मजारों को हटाने के मुद्दे पर विवाद गहराता जा रहा है। हालांकि संस्थान प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रमजान के महीने में इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे में फिलहाल यह मामला अगले कुछ सप्ताह के लिए ठंडे बस्ते में चला गया है।

28 फरवरी तक दिया गया था समय
विश्वविद्यालय प्रशासन ने जनवरी में परिसर में मौजूद पांच मजारों पर नोटिस चस्पा कर निर्धारित समय सीमा के भीतर उन्हें हटाने को कहा था। पहले नोटिस के बाद अतिरिक्त समय भी दिया गया था, जिसकी अंतिम तिथि 28 फरवरी तय की गई थी। प्रशासन का कहना है कि संबंधित निर्माणों के लिए कोई आधिकारिक अनुमति या आदेश उपलब्ध नहीं है और इससे परिसर में आवागमन व व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।

विरोध के बाद बढ़ा मामला
नोटिस जारी होने के बाद कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई और इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय बताया। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई। इसके बाद स्थिति संवेदनशील होती देख प्रशासन ने रमजान तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने का निर्णय लिया है। नोटिस के दायरे में परिसर के विभिन्न हिस्सों में स्थित पांच मजार शामिल हैं। इनमें क्वीन मेरी अस्पताल गेट के पास, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, ट्रॉमा सेंटर, ऑर्थोपेडिक सुपर स्पेशियलिटी भवन और टीजी हॉस्टल क्षेत्र के पास स्थित स्थल बताए जा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि ये निर्माण अधिकृत नहीं हैं और संस्थान की भूमि पर अतिक्रमण की श्रेणी में आते हैं।
पहले भी हटाए गए अवैध निर्माण
केजीएमयू प्रशासन के अनुसार, बीते महीनों में परिसर की कई अन्य जगहों से अवैध कब्जे हटाए जा चुके हैं और बड़ी मात्रा में भूमि खाली कराई गई है। शेष स्थलों को भी नियमानुसार खाली कराने की प्रक्रिया जारी है। रमजान के दौरान शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कार्रवाई को स्थगित किया गया है। अब इस विषय पर आगे का निर्णय रमजान के बाद लिया जाएगा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच संवाद की संभावना भी जताई जा रही है, ताकि समाधान शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जा सके।
