अस्पताल के कक्ष संख्या-5 में संचालित आईसीटीसी सेंटर पर एचआईवी संक्रमण की जांच, काउंसलिंग तथा गर्भवती महिलाओं की अनिवार्य स्क्रीनिंग की व्यवस्था है। लेकिन मरीजों का कहना है कि कई बार केंद्र पर पहुंचने पर कक्ष बंद मिलता है या वहां कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं रहता। ऐसे में लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई मरीज बिना जांच कराए ही वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच न होने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ने की आशंका बनी रहती है। मरीजों का आरोप है कि नियमित रूप से सेवाएं उपलब्ध न होने से सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर उनका भरोसा प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि संबंधित कर्मचारी ड्यूटी पर उपस्थित नहीं रहता, तो केंद्र के रजिस्टर और अन्य आवश्यक अभिलेखों का संचालन किस प्रकार किया जा रहा है। इसे लेकर अस्पताल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत एचआईवी संक्रमण की रोकथाम, समय पर जांच और जागरूकता को विशेष महत्व दिया जा रहा है। ऐसे में जांच केंद्रों पर व्यवस्थाओं में कमी आने से अभियान के उद्देश्यों पर भी असर पड़ सकता है।
क्षेत्रीय लोगों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों से मामले की जांच कर आईसीटीसी सेंटर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने तथा जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि मरीजों को समयबद्ध और सुचारु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
