Delhi Excise Policy Case: बहुचर्चित दिल्ली आबकारी नीति मामले में Rouse Avenue Court ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia सहित अन्य आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर आपराधिक साजिश का प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार नहीं बनता। हालांकि, यह राहत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से दर्ज मामले में मिली है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामले में अलग प्रक्रिया जारी रहेगी। सूत्रों के अनुसार, CBI इस आदेश को Delhi High Court में चुनौती दे सकती है।
क्या था मामला?
कोविड काल के दौरान लागू की गई ‘दिल्ली आबकारी नीति 2021-22’ को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। आरोप था कि नीति निर्माण और क्रियान्वयन के दौरान कुछ निजी पक्षों को लाभ पहुंचाया गया। उपराज्यपाल की सिफारिश के बाद CBI ने अगस्त 2022 में एफआईआर दर्ज की थी। बाद में ED ने धन शोधन के आरोपों की जांच शुरू की। CBI का दावा था कि कथित रूप से एक लॉबी ने नीति से लाभ पाने के लिए रिश्वत दी। वहीं बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि आरोप राजनीतिक हैं और किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष सबूत उपलब्ध नहीं है।
अदालत का अवलोकन
विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा था। फैसले में कहा गया कि आरोप तय करने के लिए आवश्यक आपराधिक साजिश का स्पष्ट आधार सामने नहीं आया। निर्णय के बाद अरविंद केजरीवाल मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा ईमानदारी से काम किया है और न्यायपालिका पर उन्हें भरोसा है। आम आदमी पार्टी ने इसे “सत्य की जीत” बताया। मामला अब उच्च न्यायालय में चुनौती की संभावनाओं के कारण आगे भी कानूनी बहस का विषय बना रह सकता है।
