प्रयागराज: Swami Avimukteshwaranand Saraswati ने उनके खिलाफ दर्ज पॉक्सो मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई से पहले बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि सच्चाई सामने लाने के लिए नार्को टेस्ट जरूरी हो, तो वे इसके लिए तैयार हैं। स्वामी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सच उजागर करने के लिए उपलब्ध सभी वैधानिक तरीकों का उपयोग होना चाहिए। उनके मुताबिक, उनके अधिवक्ता अदालत में मौजूद हैं और वे न्यायालय के समक्ष सभी साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।
अग्रिम जमानत पर सुनवाई
स्वामी की अग्रिम जमानत याचिका पर Allahabad High Court में आज अपराह्न करीब पौने चार बजे सुनवाई प्रस्तावित है। मठ परिसर में मीडिया की मौजूदगी के बीच उनके प्रतिनिधियों ने बताया कि स्वामी अपनी नियमित धार्मिक गतिविधियों में भाग ले रहे हैं।
क्या है नार्को टेस्ट?
नार्को टेस्ट एक वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें विशेषज्ञों की निगरानी में दवा के प्रभाव में पूछताछ की जाती है। यह जांच केवल अदालत की अनुमति और संबंधित व्यक्ति की सहमति से ही की जा सकती है। हालांकि, इसकी कानूनी स्वीकार्यता और विश्वसनीयता को लेकर न्यायालयों ने समय-समय पर दिशानिर्देश तय किए हैं।
आरोपों पर प्रतिक्रिया
स्वामी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि एक मेडिकल रिपोर्ट मात्र से किसी की संलिप्तता सिद्ध नहीं की जा सकती। उनका कहना है कि यदि कोई घटना हुई भी हो, तो उससे स्वतः यह साबित नहीं होता कि उसके लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत से जुड़े कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए जाने चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। स्वामी का दावा है कि सच्चाई अंततः सामने आएगी। इससे पूर्व भी स्वामी ने दर्ज प्रकरण को बेबुनियाद बताते हुए कहा था कि यह उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय पर उन्हें पूर्ण विश्वास है और वे कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे। मामले में आगे की सुनवाई और न्यायालय के आदेश पर सभी की नजरें टिकी हैं।
