Yogi government: उत्तर प्रदेश सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में तैनात संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया है। उन पर गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप साबित होने के बाद यह फैसला लिया गया। साथ ही उन्हें भविष्य में किसी भी सरकारी सेवा के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। सरकारी आदेश के मुताबिक विभागीय जांच, उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों, संबंधित अधिकारी के स्पष्टीकरण और लोक सेवा आयोग की सहमति के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। जांच में लगाए गए 15 आरोपों में से 14 आरोप सही पाए गए।
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि शेषनाथ पांडेय पर वित्तीय गड़बड़ी, कदाचार, तथ्य छिपाने, न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करने और नियमों के विपरीत फैसले लेने जैसे गंभीर आरोप थे। इन कृत्यों को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 का उल्लंघन माना गया। आरोप यह भी है कि उन्होंने एक मदरसे में पहले से सेवा समाप्त किए जा चुके व्यक्ति के लिए बिना वैध पुनर्नियुक्ति आदेश के वित्तीय स्वीकृति बहाल कर वेतन भुगतान का आदेश जारी कर दिया। इससे एक ही पद पर दो लोगों को वेतन मिलने की स्थिति बन गई।
जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित अधिकारी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय लिए और मदरसा नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन किया।बताया जा रहा है कि इस मामले को फरवरी 2026 में लोक सेवा आयोग को भेजा गया था। आयोग की सहमति मिलने के बाद राज्यपाल की मंजूरी से बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया गया और विभागीय कार्रवाई पूरी कर दी गई।
