UP Madarsa News: उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार 53 साल पुराने कानून में संशोधन कर मदरसों को राज्य विश्वविद्यालयों से जोड़ने की योजना बना रही है। इस कदम का उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को भी मान्यता प्राप्त डिग्री दिलाना और उन्हें उच्च शिक्षा व रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार की योजना के अनुसार मदरसा शिक्षा परिषद के तहत संचालित उच्च स्तर की कक्षाओं को संबंधित विश्वविद्यालयों से संबद्ध किया जाएगा। इसके बाद इन कक्षाओं की परीक्षाएं विश्वविद्यालयों के माध्यम से कराई जाएंगी और सफल विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की ओर से डिग्री प्रदान की जाएगी।
फिलहाल मदरसों में दी जाने वाली डिग्रियों को हर जगह मान्यता नहीं मिल पाती है, जिससे वहां पढ़ने वाले छात्रों को आगे की पढ़ाई या नौकरी के अवसरों में कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाने की तैयारी की है, ताकि मदरसा छात्रों को भी अन्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों की तरह समान अवसर मिल सकें। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिस जिले में मदरसा स्थित होगा, उसे उसी जिले के विश्वविद्यालय से संबद्ध किया जाएगा। इसके तहत विश्वविद्यालय ही परीक्षा प्रक्रिया का संचालन करेगा और शैक्षणिक मानकों को सुनिश्चित करेगा।
मदरसों में दी जाने वाली पारंपरिक डिग्रियों की समकक्षता भी तय की गई है। इसमें ‘मुंशी’ को हाईस्कूल, ‘मौलवी’ को इंटरमीडिएट, ‘कामिल’ को स्नातक और ‘फाजिल’ को परास्नातक के बराबर माना जाता है। इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए ‘उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973’ में संशोधन की तैयारी की जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे अंतिम मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ने में मदद मिलेगी और छात्रों को देश-विदेश में शिक्षा व रोजगार के अवसर प्राप्त करने में आसानी होगी। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार के मंत्री संजय निषाद ने कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था संविधान के आधार पर होनी चाहिए और सभी के लिए समान नियम होने चाहिए। उनका कहना है कि चाहे धार्मिक शिक्षा हो या सामान्य शिक्षा, सभी के लिए कानून और व्यवस्था एक जैसी होनी चाहिए।
