वन दिवस: लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर आयोजित ‘अरण्य समागम : राष्ट्रीय वानिकी संवाद’ कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का असर अब हर व्यक्ति महसूस कर रहा है और यह समय है कि हम अपनी गलतियों पर गंभीरता से विचार करें।

प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी समझने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति को ‘मां’ का दर्जा दिया गया है। हमारे ऋषि-मुनियों ने सदियों पहले ही चेतावनी दी थी कि प्रकृति के संतुलन से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। आज जो प्राकृतिक आपदाएं और जलवायु परिवर्तन के असर दिख रहे हैं, वे उसी लापरवाही का परिणाम हैं।
कार्यक्रम में वन प्रबंधन, डिजिटलीकरण, मानव-वन्यजीव संघर्ष और कैम्पा निधि के उपयोग जैसे अहम विषयों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने मिलकर भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

वृक्षारोपण में बड़ी उपलब्धि

सीएम योगी ने बताया कि पिछले 9 वर्षों में राज्य में 242 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य हासिल किया गया है। साथ ही ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियान के जरिए लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। राज्य में बड़ी संख्या में पौधों की नर्सरी भी तैयार की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2017 में जहां प्रदेश में सिर्फ एक रामसर साइट थी, अब उनकी संख्या बढ़कर 11 हो गई है, जो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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