नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर संसद में चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में देश को भरोसा दिलाया कि सरकार तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने देने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है।

आयात के स्रोत बढ़ाए गए

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा आयात के स्रोतों का विस्तार किया है। पहले जहां देश करीब 27 देशों से कच्चा तेल और गैस लेता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 41 हो गई है। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करना और आपूर्ति को सुरक्षित बनाना है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में वैश्विक संकट का असर पड़ना स्वाभाविक है, लेकिन इसके बावजूद आपूर्ति को सुचारु रखने पर ध्यान दिया जा रहा है।

भंडारण और रिफाइनिंग क्षमता में बढ़ोतरी

पीएम ने बताया कि देश में कच्चे तेल के रणनीतिक भंडारण को मजबूत किया गया है। साथ ही रिफाइनिंग क्षमता में भी इजाफा हुआ है, जिससे आपात स्थिति में भी जरूरतों को पूरा किया जा सके। सरकार पारंपरिक ईंधन के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी काम कर रही है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ाया गया है और रेलवे के विद्युतीकरण से भी तेल की खपत में कमी आई है। इससे ऊर्जा पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।

वैश्विक समन्वय पर फोकस

पश्चिम एशिया में हालात को देखते हुए सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार संपर्क में है, ताकि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और जरूरी आपूर्ति देश तक पहुंचती रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि वैश्विक संकट का असर किसानों पर न पड़े। उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कदम उठाए गए हैं। साथ ही, देश में उर्वरक उत्पादन बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है।

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