लखनऊ। राजधानी के निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर अब सख्त निगरानी रखी जाएगी। नए नियमों के तहत विद्यालयों को आगामी शैक्षणिक सत्र की फीस का पूरा विवरण कम से कम 60 दिन पहले अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा।
जिला शुल्क नियामक समिति का गठन कर दिया गया है, जो स्कूलों की फीस से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखेगी। यह समिति जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कार्य करेगी, जबकि जिला विद्यालय निरीक्षक को सदस्य सचिव बनाया गया है।
नियमों के अनुसार, निजी विद्यालयों को अपनी फीस संरचना की जानकारी जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को भी देनी होगी। यदि किसी अभिभावक या छात्र की ओर से शिकायत मिलती है और स्कूल नियमों का पालन नहीं करता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
- सत्र शुरू होने से 60 दिन पहले फीस का खुलासा अनिवार्य
- सत्र के दौरान फीस में कोई वृद्धि नहीं
- अधिकतम 5% तक ही फीस बढ़ोतरी की अनुमति
- पांच साल से पहले यूनिफॉर्म बदलने पर रोक
- किसी विशेष दुकान से किताब/यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव नहीं
- कैपिटेशन फीस पर पूरी तरह प्रतिबंध
इसके अलावा, छात्रों से ली जाने वाली फीस मासिक, त्रैमासिक या अर्द्धवार्षिक किस्तों में ही ली जाएगी। एकमुश्त वार्षिक फीस लेने पर रोक रहेगी।
समिति को यह अधिकार भी दिया गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर जुर्माना लगाया जा सके। पहली बार दोषी पाए जाने पर एक लाख रुपये, दूसरी बार पांच लाख रुपये तक का दंड लगाया जाएगा। बार-बार उल्लंघन होने पर स्कूल की मान्यता तक रद्द की जा सकती है। इस व्यवस्था से अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।
