मोहनलालगंज, लखनऊ। राजधानी की मोहनलालगंज तहसील एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह प्रशासनिक पारदर्शिता नहीं बल्कि कथित अनियमितताएं और भ्रष्टाचार के आरोप हैं। तहसील की कार्यप्रणाली को लेकर अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आदेश के बदले पैसे मांगने का आरोप
ताजा मामला कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में बदलने से जुड़ी प्रक्रिया ‘धारा 80’ से संबंधित है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर अवैध वसूली की जा रही है। तहसील दिवस में दी गई शिकायत के अनुसार, एक फाइल को आगे बढ़ाने और आदेश पारित कराने के लिए कथित तौर पर बड़ी रकम की मांग की गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि भुगतान के बाद ही फाइल पर तेजी से कार्रवाई की गई, जिससे पूरे सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
बिना आवेदन जमीन परिवर्तन का मामला
इसी बीच एक और मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर चिंता बढ़ा दी है। काजीखेड़ा गांव के एक किसान को तब हैरानी हुई जब उन्हें पता चला कि उनकी जमीन का उपयोग परिवर्तन आदेश जारी हो चुका है, जबकि उन्होंने इसके लिए कोई आवेदन ही नहीं किया था। प्रारंभिक जांच में राजस्व विभाग की रिपोर्ट में इस प्रक्रिया को संदिग्ध बताया गया है और आदेश को निरस्त करने की सिफारिश की गई है।
तहसील परिसर में दलालों की सक्रियता पर सवाल
लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका आरोप है कि तहसील परिसर में बिचौलियों और कुछ कर्मचारियों के बीच सांठगांठ से कामकाज प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि बिना अतिरिक्त भुगतान के आम लोगों के कार्य समय पर नहीं हो पाते, जबकि पैसे देने वालों की फाइलें प्राथमिकता से निपटाई जाती हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
अधिवक्ताओं और शिकायतकर्ताओं ने उच्च अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन किया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या तहसील की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।
