मोहनलालगंज, लखनऊ। विकास खंड मोहनलालगंज के दयालपुर स्थित छबीलेखेड़ा गांव में गुरुवार को भारत सरकार के “मेरा गांव मेरा गौरव” अभियान के अंतर्गत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में चार महिला किसानों सहित कुल 29 किसानों ने भाग लिया, जहां वैज्ञानिकों की टीम ने आधुनिक और टिकाऊ खेती के तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खेती के महत्व के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर नकारात्मक असर पड़ रहा है, इसलिए जैविक विकल्प अपनाना जरूरी है। किसानों से संवाद के दौरान यह भी सामने आया कि कई किसान अनुशंसित मात्रा से अधिक रासायनिक खाद का उपयोग कर रहे हैं।

वैज्ञानिकों ने कृषि, बागवानी और मछली पालन में जैविक खाद के प्रयोग को बढ़ाने की सलाह दी। साथ ही फसल चक्र अपनाने और दलहनी फसलों को शामिल कर मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया गया। जायद सीजन में ढैंचा, सनई और मूंग जैसी हरी खाद वाली फसलें उगाने के लिए किसानों को प्रेरित किया गया।

इसके अलावा सब्जी उत्पादन में यूरिया के बजाय नीम और सरसों की खली तथा मछली पालन में डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फॉस्फेट और गोबर के उपयोग की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के अंत में सभी किसानों ने रासायनिक खाद के उपयोग को कम करने और जैविक व हरी खाद अपनाने का संकल्प लिया। यह आयोजन संस्थान की निदेशक डॉ. काजल चक्रबर्ती के निर्देशन में हुआ, जिसमें वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार और तकनीकी सहायक अंशुल वर्मा का विशेष सहयोग रहा।

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