लखनऊ। पेपर लीक, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ छात्रों पर कथित दमन के विरोध में शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में परिवर्तन चौक से शहीद स्मारक तक एक शांतिपूर्ण प्रतिरोध मार्च निकाला गया। मार्च में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, युवाओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने भाग लेकर शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद की।

मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं, शिक्षा के निजीकरण और छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की घटनाओं ने युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। वक्ताओं ने दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसका सम्मान होना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग, केंद्र और उत्तर प्रदेश में हुए सभी पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई, छात्रों पर दर्ज मुकदमों की वापसी, दिल्ली में पुलिस कार्रवाई की जांच तथा परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों के परिवारों को न्याय और मुआवजा देने की मांग शामिल रही।

इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने लखनऊ विश्वविद्यालय सहित अन्य शिक्षण संस्थानों में बढ़ाई गई फीस वापस लेने और निष्कासित छात्रों की बहाली की भी मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक संगठन या विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने शिक्षा को मौलिक अधिकार और रोजगार को युवाओं का अधिकार बताते हुए कहा कि इन मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
प्रतिरोध मार्च का समापन शहीद स्मारक पर संविधान, शिक्षा के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लेने के साथ हुआ। इस दौरान उपस्थित लोगों ने शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने की बात कही।
मार्च में प्रमुख रूप से सुधांशु बाजपेई, महेंद्र कुमार यादव, शांतम निधि, समर, अनिल यादव “मास्टर”, अंकित गुप्त, प्रदीप शर्मा, अब्दुल वहाब, क्रांति कुमार सिंह, दीपक कबीर, अहमद रजा, विशाल सिंह, ज्योति राय, प्रिंस प्रकाश सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और युवा मौजूद रहे।
