पीड़िता के मुताबिक उनके पति स्वर्गीय शिवनाथ विश्वकर्मा ने पिरामल हाउसिंग फाइनेंस से आवास निर्माण के लिए करीब 10 लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण के बदले डिघारी-उतरावां स्थित मकान की मूल रजिस्ट्री बैंक के पास बंधक के रूप में जमा कराई गई थी।
शिव देवी ने बताया कि 8 अक्टूबर 2025 को उनके पति का निधन हो गया था। इसके बाद परिवार ने शेष बकाया राशि का भुगतान करते हुए 30 मई 2026 को पूरे ऋण खाते का निस्तारण कर दिया। बावजूद इसके, बैंक में जमा मूल रजिस्ट्री और अन्य आवश्यक दस्तावेज परिवार को वापस नहीं मिले हैं।
पीड़िता का कहना है कि ऋण का पूर्ण भुगतान होने के बाद संपत्ति से संबंधित मूल अभिलेख वापस मिलना उनका अधिकार है। दस्तावेज न मिलने से भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी अथवा प्रशासनिक समस्या उत्पन्न होने की आशंका बनी हुई है।
उन्होंने बैंक प्रबंधन एवं संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर उनकी संपत्ति के मूल दस्तावेज शीघ्र उपलब्ध कराए जाएं। हालांकि, इस मामले में बैंक प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
