पुलिस को सूचना मिली थी कि आवास विकास योजना स्थित लाइट हाउस परिसर के एक फ्लैट से संदिग्ध बैंकिंग गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में पुलिस ने चार युवकों को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद उनकी पहचान उन्नाव निवासी सत्येंद्र सविता तथा बिहार के पूर्वी चंपारण निवासी निप्पु कुमार, मनीष कुमार और सन्नी कुमार के रूप में हुई।
भारी मात्रा में बैंकिंग सामग्री बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 79 चेकबुक, 77 एटीएम कार्ड, 29 सिम कार्ड, 15 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 14 कीपैड मोबाइल, तीन लैपटॉप, छह पीओएस मशीनें तथा विभिन्न कंपनियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामग्री साइबर अपराध के संगठित नेटवर्क की ओर संकेत करती है।
फर्जी कंपनियों के नाम पर खुलवाए जाते थे खाते
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियां या फर्म पंजीकृत कराई जाती थीं और उनके नाम से करंट बैंक खाते खुलवाए जाते थे। बाद में इन्हीं खातों में साइबर ठगी से प्राप्त रकम जमा कराई जाती थी।
आरोपी बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, मोबाइल नंबर और ओटीपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बदले कमीशन प्राप्त करते थे। गिरोह के अन्य सदस्य इन खातों के माध्यम से ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर उसके स्रोत को छिपाने का प्रयास करते थे।
देशभर की सैकड़ों शिकायतों से जुड़े मिले तार
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपियों से जुड़े बैंक खातों के विरुद्ध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर देश के विभिन्न राज्यों से कुल 718 शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब इन मामलों की कड़ियों को जोड़ते हुए गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है, जबकि फरार सहयोगियों की तलाश जारी है।
डीसीपी ने क्या कहा
डीसीपी दक्षिण अमित कुमार आनंद ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का मामला प्रतीत हो रहा है। बरामद बैंक दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और खातों की विस्तृत जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर इसमें शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
