मोहनलालगंज, लखनऊ। रजिस्ट्री व्यवस्था में बदलाव के विरोध में पांच अगस्त से चल रहा मोहनलालगंज बार एसोसिएशन का आंदोलन गुरुवार को जिलाधिकारी से हुई सकारात्मक वार्ता के बाद समाप्त हो गया। वार्ता में प्रशासन की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद अधिवक्ताओं ने शुक्रवार से न्यायालयों में नियमित कामकाज शुरू करने का निर्णय लिया है।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी लखनऊ से मुलाकात कर रजिस्ट्री कार्यालय से संबंधित शासनादेश और उससे उत्पन्न समस्याओं पर चर्चा की। वार्ता के दौरान जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि अगले दो माह तक मोहनलालगंज और कैसरबाग दोनों स्थानों पर रजिस्ट्री का काम जारी रहेगा।
बार एसोसिएशन के महामंत्री राम लखन यादव के अनुसार, मोहनलालगंज में रजिस्ट्री कार्य के बढ़ते दबाव को देखते हुए एक अतिरिक्त सब-रजिस्ट्रार की तैनाती का भी आश्वासन दिया गया है। उन्होंने बताया कि दो माह की अवधि पूरी होने के बाद दोनों स्थानों पर रजिस्ट्री से संबंधित आदेश को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही गई है।
पांच अगस्त से चल रहा था विरोध
रजिस्ट्री कार्यालय के क्षेत्राधिकार में बदलाव को लेकर मोहनलालगंज बार एसोसिएशन के अधिवक्ता पांच अगस्त से विरोध कर रहे थे। अधिवक्ताओं का कहना था कि नई व्यवस्था से क्षेत्र के किसानों, वादकारियों, अधिवक्ताओं और आम लोगों को रजिस्ट्री के लिए अतिरिक्त भागदौड़ करनी पड़ेगी। आंदोलन के चलते न्यायालयों और रजिस्ट्री से जुड़े कार्य भी प्रभावित हुए थे।
गुरुवार को जिलाधिकारी के साथ हुई बैठक में प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच सहमति बनने के बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया।
बार अध्यक्ष कौशलेन्द्र शुक्ला ने कहा कि अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया। प्रशासन की ओर से समस्याओं पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए दो माह तक दोनों स्थानों पर रजिस्ट्री जारी रखने और मोहनलालगंज में अतिरिक्त सब-रजिस्ट्रार की तैनाती का आश्वासन दिया गया है। इसी के बाद आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार से अधिवक्ता न्यायालयों में नियमित रूप से काम करेंगे। बार एसोसिएशन का निर्णय अधिवक्ताओं के साथ-साथ वादकारियों और आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
वार्ता में बार अध्यक्ष कौशलेन्द्र शुक्ला, महामंत्री राम लखन यादव, पूर्व अध्यक्ष केपी सिंह, अनिल अस्थाना, ऋषि द्विवेदी, शिव अटल सिंह, अमरेंद्र सिंह, यशवीर सिंह समेत कई अधिवक्ता मौजूद रहे।
