जानकारी के अनुसार, गांव के मौजूदा ग्राम प्रधान ने निर्माण कार्य शुरू होने की सूचना तत्काल क्षेत्रीय लेखपाल और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) मोहनलालगंज को फोन के माध्यम से दी। आरोप है कि सूचना देने के बावजूद संबंधित स्थल पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई और निर्माण कार्य जारी रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि पर निर्माण कराया जा रहा है, वह पशुओं के चरने के लिए आरक्षित सरकारी पशुचर भूमि है। यदि इस भूमि पर कब्जा हो गया तो भविष्य में ग्रामीणों और पशुपालकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों को बढ़ावा मिल रहा है। उनका कहना है कि शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने से लोगों का प्रशासन पर विश्वास प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की तत्काल मौके पर जांच कराई जाए, निर्माण कार्य को रोका जाए तथा यदि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे हटाकर पशुचर भूमि को कब्जा मुक्त कराया जाए।
फिलहाल इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है। वहीं, प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।संघ
