निगोहां, लखनऊ। मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत के निस्तारण और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के आदेश जारी होने के बावजूद मोहनलालगंज-निगोहां मार्ग स्थित मदाखेड़ा मंदिर चौराहे पर रोडवेज बसों का ठहराव अब तक शुरू नहीं हो सका है। इससे क्षेत्र के हजारों यात्रियों को रोजाना आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

क्षेत्र के कुशमौरा गांव निवासी शिक्षक वीरेंद्र कुमार अवस्थी ने जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर मदाखेड़ा मंदिर चौराहे पर रोडवेज बसों के ठहराव की मांग की थी। शिकायत के निस्तारण के दौरान परिवहन विभाग ने मामले की जांच कराई।

जांच के बाद चारबाग डिपो की ओर से नियमित बस स्टॉप घोषित करने में असमर्थता जताई गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक ने जनहित को देखते हुए मदाखेड़ा मंदिर चौराहे को “प्रार्थना स्टॉप” के रूप में स्वीकृति प्रदान की। आदेश में इस मार्ग से गुजरने वाली बसों के चालक और परिचालकों को यात्रियों को वहां से बैठाने और उतारने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके संबंध में संबंधित डिपो और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए।

इसके बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकांश रोडवेज बसें आज भी बिना रुके आगे निकल जाती हैं। इससे मदाखेड़ा मंदिर चौराहे से जुड़े पांच दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रतिदिन शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और सरकारी कार्यों के लिए लखनऊ एवं मोहनलालगंज आने-जाने वाले यात्रियों को मजबूरन दूर स्थित बस स्टॉप तक जाना पड़ता है या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि सबसे अधिक दिक्कत छात्रों, महिलाओं, बुजुर्गों, किसानों और नौकरीपेशा लोगों को होती है। उनका आरोप है कि विभागीय आदेशों के बावजूद बसों का निर्धारित स्थान पर नहीं रुकना अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी को दर्शाता है।

शिकायतकर्ता वीरेंद्र कुमार अवस्थी ने कहा कि जब परिवहन निगम स्वयं मदाखेड़ा मंदिर चौराहे को प्रार्थना स्टॉप के रूप में मान्यता देकर बसें रोकने के निर्देश जारी कर चुका है, तो उनका पालन सुनिश्चित कराया जाना चाहिए। उन्होंने परिवहन विभाग से तत्काल प्रभावी कार्रवाई कर आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।

वहीं क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही रोडवेज बसों का ठहराव शुरू नहीं कराया गया, तो वे दोबारा मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के साथ जनआंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

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