मोहनलालगंज, लखनऊ। मोहनलालगंज तहसील में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान सिसेंडी गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने अपनी वर्षों पुरानी भूमि पर कब्जे को लेकर दर्ज किए गए वाद पर आपत्ति जताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 50 वर्षों से उनके कब्जे वाली भूमि को लेकर तथ्यों के विपरीत न्यायालय में वाद दायर कर उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि एक व्यक्ति द्वारा उपजिलाधिकारी न्यायालय, मोहनलालगंज में धारा 134 के अंतर्गत कब्जा एवं बेदखली से संबंधित वाद दायर किया गया है। उनका आरोप है कि इस वाद में लगाए गए तथ्य वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते और इसे गलत आधार पर प्रस्तुत किया गया है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार वर्ष 1979 में उन्होंने संबंधित भूमि तत्कालीन स्वामी से विधिवत खरीदी थी। तब से सभी लोग अपने-अपने हिस्से पर मकान और दुकान बनाकर लगातार निवास एवं व्यवसाय कर रहे हैं। उनका कहना है कि लगभग पांच दशक से उनका कब्जा निर्विवाद रूप से बना हुआ है और इस दौरान कभी भी किसी प्रकार की आपत्ति नहीं उठाई गई।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि इसी भूमि विवाद को लेकर वर्ष 2025 में स्थानीय थाने में शिकायत की गई थी, जिसमें दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए थे। इसके बावजूद अब दोबारा न्यायालय में वाद दायर कर उन्हें परेशान किया जा रहा है।
प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि न्यायालय में दाखिल वाद में कई व्यक्तियों के नाम और विवरण गलत दर्ज किए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ ऐसे लोगों को भी पक्षकार बनाया गया है जिनका निधन हो चुका है, जबकि अन्य व्यक्तियों का विवरण भी त्रुटिपूर्ण है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर फर्जी तथ्यों पर आधारित वाद को निरस्त कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित पक्ष के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
इस संबंध में उपजिलाधिकारी पवन पटेल ने बताया कि प्राप्त शिकायत को संबंधित अधिकारियों को जांच के लिए भेज दिया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
