लखनऊ। राजधानी के बीबीडी थाना क्षेत्र में चोरी के एक मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि खाली मकान में हुई चोरी की जांच के दौरान पुलिस ने चोरी के कथित सामान के साथ एक संदिग्ध को पकड़ा, लेकिन बाद में कथित तौर पर ₹15 हजार के लेनदेन के बाद उसे बिना कानूनी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।

जानकारी के अनुसार, बीबीडी क्षेत्र में एक खाली मकान को निशाना बनाकर चोरी की घटना हुई थी। मामले की जांच के दौरान पुलिस टीम ने सतरिख रोड इलाके से चांद बाबू नाम के एक व्यक्ति को कथित तौर पर चोरी के सामान के साथ पकड़ा था।

आरोप है कि कार्रवाई में दरोगा अशोक वर्मा समेत कुछ पुलिसकर्मी शामिल थे। हालांकि, दावा किया जा रहा है कि कथित रूप से चोरी का सामान बरामद होने के बावजूद आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय उसे थाने से ही छोड़ दिया गया।

₹15 हजार के लेनदेन का आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोप कथित ₹15 हजार के लेनदेन का है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि रकम के बदले मामले को दबाने की कोशिश की गई और पकड़े गए व्यक्ति को छोड़ दिया गया।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।

वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर टिकी नजर

मामले में अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि पुलिस ने वास्तव में चोरी के सामान के साथ किसी व्यक्ति को पकड़ा था, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। वहीं, कथित लेनदेन के आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए वरिष्ठ स्तर पर जांच की मांग भी उठ रही है।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और उनके खिलाफ संभावित कार्रवाई भी अहम होगी।

राजधानी में चोरी की घटनाओं पर पुलिस लगातार कार्रवाई का दावा करती रही है। ऐसे में बीबीडी थाने से जुड़े इन आरोपों ने पुलिस की जवाबदेही, पारदर्शिता और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मामले का संज्ञान लेते हैं या नहीं और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।

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