मोहनलालगंज। अमेठी जिले के गदागंज थाना क्षेत्र के रूप का पुरवा मजरे पयागपुर निवासी उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड में स्टोर कीपर के पद पर तैनात 36 वर्षीय ओम प्रकाश मौर्य की बीते शुक्रवार हृदयाघात से मौत हो गई। अचानक हुई मौत की खबर से परिवार में मातम छा गया। पत्नी, दो बेटियों और बुजुर्ग माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।

परिजनों ने ओम प्रकाश के निलंबन के बाद वेतन और जीवन निर्वाह भत्ते के भुगतान में कथित देरी को लेकर विभागीय अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का दावा है कि आर्थिक परेशानियों और मानसिक दबाव के कारण ओम प्रकाश काफी तनाव में रहते थे।

बदायूं में थी तैनाती, सितंबर 2025 में हुए थे निलंबित

परिजनों के मुताबिक, ओम प्रकाश मौर्य की तैनाती बदायूं जिले में थी और उन्हें वहां जिला प्रभारी की जिम्मेदारी भी दी गई थी। विभागीय कार्रवाई के तहत 11 सितंबर 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

परिवार का आरोप है कि निलंबन के बाद वेतन और जीवन निर्वाह भत्ते के भुगतान को लेकर लगातार परेशानी बनी रही। उनका कहना है कि समय पर भुगतान नहीं होने से घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई और परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्चों के साथ बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी निभाना भी मुश्किल हो गया।

बेटियों की पढ़ाई को लेकर थे चिंतित

परिजनों के अनुसार, ओम प्रकाश परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों का मुख्य सहारा थे। उनकी 16 वर्षीय बेटी मोनिका और 13 वर्षीय श्रेया की पढ़ाई के अलावा बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और घरेलू खर्च की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर थी।

पत्नी का आरोप है कि उनके पति को विभागीय मामले में गलत तरीके से फंसाकर निलंबित किया गया। परिवार का कहना है कि यदि निलंबन के दौरान समय से वेतन और जीवन निर्वाह भत्ता मिलता रहता तो आर्थिक संकट की स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल

परिजनों ने तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक ओमेंद्र कुमार और वर्तमान क्षेत्रीय प्रबंधक बरेली विनीत कुमार चौहान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि विभागीय मामले में वास्तविक जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई करने के बजाय ओम प्रकाश को निलंबन का सामना करना पड़ा।

परिजनों ने यह भी दावा किया कि निलंबन के बाद लंबे समय तक जीवन निर्वाह भत्ता नहीं मिला। इससे परिवार के सामने आर्थिक संकट और बढ़ गया।

रिकॉर्ड की जांच और कार्रवाई की मांग

ओम प्रकाश की मौत के बाद परिजनों ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जल्द ही थाने में तहरीर देकर पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की जाएगी।

परिवार ने विभागीय स्तर पर ओम प्रकाश के निलंबन, वेतन भुगतान और जीवन निर्वाह भत्ते से जुड़े अभिलेखों की जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि भुगतान में देरी हुई या नहीं और यदि हुई तो इसके लिए कौन जिम्मेदार था।

ओम प्रकाश की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों का संकट खड़ा हो गया है। दोनों बेटियों के भविष्य को लेकर परिजन चिंतित हैं। घटना की जानकारी के बाद गांव में भी शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, वेतन या जीवन निर्वाह भत्ते में कथित देरी और अधिकारियों की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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