मोहनलालगंज, लखनऊ। मोहनलालगंज क्षेत्र में सांप के डसने से महज 22 दिन की मासूम बच्ची की मौत हो गई। बच्ची को बचाने के लिए परिजन रात में पहले सीएचसी मोहनलालगंज पहुंचे। वहां से उसे सिविल अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद सिविल अस्पताल से भी बच्ची को झलकारीबाई अस्पताल भेजा गया, लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें पैदल ही बच्ची को लेकर जाना पड़ा। झलकारीबाई अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया।

उदयपुर निवासी दिलीप कुमार की 22 दिन की बेटी गुरुवार रात अपनी मां पूजा और दो बहनों सावनी (8) व तृषा (5) के साथ घर में सो रही थी। मां पूजा के मुताबिक, रात करीब दो बजे बच्ची के रोने की आवाज सुनकर उनकी नींद खुली। बच्ची को देखने पर उन्होंने कथित तौर पर देखा कि उसके बाएं हाथ की उंगली को सांप ने मुंह में दबा रखा था।
शोर सुनकर परिवार के अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे और किसी तरह बच्ची को सांप से अलग किया। इसके बाद परिजन गंभीर हालत में बच्ची को बाइक से सीएचसी मोहनलालगंज लेकर पहुंचे।
एक के बाद दूसरे अस्पताल भेजने का आरोप
परिजनों के मुताबिक, सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिवार बच्ची को लेकर लखनऊ के सिविल अस्पताल पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि वहां चिकित्सकों ने सांप की पहचान के लिए उसकी फोटो मांगी। परिवार के पास फोटो उपलब्ध नहीं होने पर बच्ची को झलकारीबाई अस्पताल रेफर किए जाने की बात कही गई।

एंबुलेंस नहीं मिली तो पैदल पहुंचे
परिजनों का आरोप है कि सिविल अस्पताल से झलकारीबाई अस्पताल जाने के लिए उन्हें तत्काल एंबुलेंस नहीं मिल सकी। बच्ची की हालत बिगड़ती देख परिवार उसे लेकर पैदल ही झलकारीबाई अस्पताल पहुंचा। वहां चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया।
मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। कुछ ही दिन पहले जिस घर में बेटी के जन्म की खुशियां थीं, वहां मातम छा गया।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश के मरीजों के लिए उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, बच्ची की मौत के लिए किसी अस्पताल की लापरवाही जिम्मेदार थी या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
परिजनों के आरोपों के बीच यह भी जांच का विषय है कि बच्ची अस्पताल किस समय पहुंची, उसकी उस समय चिकित्सकीय स्थिति क्या थी, उसे कौन-कौन से उपचार दिए गए और अलग-अलग अस्पतालों में रेफर किए जाने का चिकित्सकीय आधार क्या था।
ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर सर्पदंश के मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त एंटी-स्नेक वेनम, प्रशिक्षित स्टाफ और आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि गंभीर मरीजों को समय रहते आवश्यक उपचार मिल सके।
कांवड़ यात्रा पर गए थे बच्ची के पिता
बताया गया कि बच्ची के पिता दिलीप कुमार घटना से करीब तीन दिन पहले बाबा धाम की कांवड़ यात्रा पर गए थे। घटना के समय घर में उनकी पत्नी पूजा और दोनों बेटियां मौजूद थीं। सांप के डसने की जानकारी के बाद परिवार ने रात में बच्ची को बचाने के लिए तत्काल अस्पतालों का रुख किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।
