मोहनलालगंज, लखनऊ। लंबित मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ का आंदोलन लगातार जारी है। आंदोलन के तीसरे चरण के तहत शनिवार को निगोहां, नगराम, मोहनलालगंज समेत जिले की विभिन्न तहसीलों में लेखपालों ने काली पट्टी पहनकर थाना दिवस में अपनी ड्यूटी निभाई। इस दौरान उन्होंने विरोध दर्ज कराते हुए शासन और राजस्व विभाग से समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग उठाई।
भत्ते से लेकर स्थायीकरण तक कई मुद्दों पर नाराजगी
लेखपाल संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक, कर्मचारियों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। संघ ने बताया कि पिछले 16 वर्षों से भत्तों में वृद्धि नहीं हुई है। वहीं, नवनियुक्त लेखपालों के परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद भी स्थायीकरण की प्रक्रिया लंबित होने का मुद्दा उठाया गया।

इसके अतिरिक्त परिषद के आदेश के बावजूद लेखपालों को पटल सहायक और प्रभारी राजस्व निरीक्षक से संबंधित अतिरिक्त कार्यों से मुक्त नहीं किए जाने, करीब एक दशक से पद को तकनीकी श्रेणी में शामिल करने की मांग पर निर्णय न होने तथा ग्राम सचिवालयों में पर्याप्त सुविधाओं, सुरक्षा और उचित भत्ते के बिना रोस्टर ड्यूटी लगाए जाने पर भी असंतोष जताया गया।
सरकारी जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद अनदेखी का आरोप
संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि लेखपाल राजस्व प्रशासन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सरकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के साथ वे सत्यापन, भूमि संबंधी कार्यों और आपदा के समय राहत से जुड़े दायित्वों का निर्वहन करते हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं पर शासन और राजस्व परिषद की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। इसी के विरोध में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन चलाया जा रहा है।
पहले भी कर चुके हैं कार्य बहिष्कार
संघ के आंदोलन के तहत 3 अक्टूबर को लेखपालों ने संपूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार किया था। इस दौरान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक धरना देकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा गया था।
इसके बाद 8 अक्टूबर को लेखपालों ने तहसील के प्रशासनिक व्हाट्सएप समूहों से बाहर निकलकर आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों, वरासत, फार्मर रजिस्ट्रेशन तथा सत्यापन समेत विभिन्न ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार किया। संघ ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
आपदा राहत कार्यों से अलग रखा विरोध
जिला अध्यक्ष विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बताया कि आंदोलन के दौरान भी लेखपाल आपदा संबंधी जिम्मेदारियों का निर्वहन दिन-रात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मानवीय संवेदनाओं और प्रभावित लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आपदा राहत के कार्यों से कोई विरोध नहीं है। जहां भी इस तरह की ड्यूटी लगाई गई है, लेखपाल पूरी निष्ठा के साथ काम कर रहे हैं।
शनिवार को निगोहां थाने में आयोजित समाधान दिवस के दौरान जिला अध्यक्ष विश्वनाथ प्रताप सिंह के साथ लेखपाल अहमद अब्बास, अशोक कुमार, मोहित सिंह, सरिता मौर्या, रिंकी साहू, शिखा यादव, रुचि मौर्या और जूही मौर्या सहित अन्य लेखपाल मौजूद रहे। सभी ने काली पट्टी पहनकर अपनी मांगों के समर्थन में विरोध दर्ज कराया।
