लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चक्रवात अर्नब और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम का मिजाज बदल गया है। प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, तेज हवाओं और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी खराब मौसम की आशंका जताते हुए कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में भारी से अति भारी बारिश, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।

तराई के जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, प्रदेश के तराई क्षेत्रों में अति भारी बारिश हो सकती है। कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच सहित आसपास के इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।

वहीं, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, गोंडा, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, अयोध्या और अंबेडकर नगर में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। इन जिलों और आसपास के क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट बताया गया है।

पश्चिमी यूपी में ओलावृष्टि के आसार

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद और रामपुर में ओले गिरने की संभावना है।

इसके अलावा प्रदेश के करीब 50 जिलों में गरज-चमक के साथ 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इनमें लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, हरदोई, कन्नौज, गाजियाबाद, नोएडा, अलीगढ़, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर सहित कई जिले शामिल हैं।

बारिश से बढ़ी ठंड, कई जिलों में बदला मौसम

गुरुवार को वाराणसी, अयोध्या, गोरखपुर, सोनभद्र और मिर्जापुर समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बारिश हुई। लखनऊ में भी बादल छाए रहे और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश दर्ज की गई। मेरठ में धुंध और ठंड के साथ दिन की शुरुआत हुई, जबकि सहारनपुर में वज्रपात की सूचना मिली।

बारिश और तेज हवाओं के कारण तापमान में गिरावट आई है, जिससे लोगों को ठंड का अहसास होने लगा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, चक्रवात और पश्चिमी विक्षोभ का संयुक्त प्रभाव प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम को प्रभावित कर सकता है।

खराब मौसम में सावधानी बरतने की अपील

बारिश, तेज हवाओं, बिजली चमकने और संभावित ओलावृष्टि को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। किसानों को भी अपनी फसलों और कृषि उपज की सुरक्षा के लिए स्थानीय मौसम संबंधी सलाह पर ध्यान देने की जरूरत है।

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