लखनऊ : संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) के नेफ्रोलॉजी विभाग “मृतक दाता प्रत्यारोपण कार्यक्रम” पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन कर रहा है। शुक्रवार को एसजीपीजीआई संस्थान के सी ब्लॉक में नेफ्रोलॉजी विभाग की दूसरी मंजिल पर स्थित सेमिनार रूम में प्रेस वार्ता कर कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी । इसके साथ ही आपको बता दें कि, नेफ्रोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांटेशन विभाग 13 और 14 मई 2023 को अपना स्थापना दिवस मना रहा है। इस अवसर पर विभाग मृतदाता प्रत्यारोपण कार्यक्रम पर सेमिनार का आयोजन कर रहा है।

डॉ नारायण प्रसाद, एचओडी, नेफ्रोलॉजी ने प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि विभाग ने तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल, कोलकाता, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे देश भर से क्षेत्र के दिग्गजों को आमंत्रित किया गया है । कार्यक्रम के पहले दिन की शुरुआत विशेषज्ञअपने-अपने राज्यों में मृतक दान कार्यक्रम चलाने में सफलता और चुनौतियों के अपने अनुभवों को साझा करेंगे । इसके बाद उत्तर प्रदेश राज्य के सरकारी प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों के साथ इन मुद्दों पर एक पैनल चर्चा होगी। दूसरे दिन में अंगदान पर शोक परामर्श, पहचान और ब्रेन-डेड घोषणा, संरक्षण, रखरखाव, आवंटन और अंत में अंगों के प्रत्यारोपण जैसी विभिन्न कार्यशालाएं शामिल होंगी। इस सम्मेलन में सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों से विभिन्न विशिष्टताओं के डॉक्टर भाग लेंगे। नेफ्रोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट सर्जन, न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरो-सर्जन, लिवर ट्रांसप्लांट-सर्जन, गैस्ट्रो-सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, कार्डियक-सर्जन, ट्रॉमा-सर्जन और एनेस्थेसियोलॉजिस्ट आदि)। प्रत्यारोपण समन्वयक सहित कई लोग मौजूद रहेंगे ।

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एसजीपीजीआईएमएस में पहला गुर्दा प्रत्यारोपण 1989 में मृतक दाता गुर्दा प्रत्यारोपण से हुआ था, लेकिन तब से केवल 43 मृतक किडनी प्रत्यारोपण किए गए हैं। केजीएमयू, एसजीपीजीआई और अपोलो मेडिक्स अस्पताल प्रत्येक ने कुछ मृतक डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किए हैं। हृदय, फेफड़े और अग्न्याशय का कोई प्रत्यारोपण नहीं किया गया है। हमारे पास अब कई निजी अस्पताल जैसे मेदांता, रीजेंसी, चरक, सहारा और चंदन आदि हैं। सभी के पास अंग प्रत्यारोपण के लिए बुनियादी ढांचा है। हमारे पास उत्तर प्रदेश में कई मेडिकल कॉलेज हैं जिनमें विशेषज्ञ सर्जन और चिकित्सक डॉक्टर हैं जो ब्रेन डेथ डिक्लेरेशन, ऑर्गन रिट्रीवल और अंत में अंग प्रत्यारोपण को बढ़ावा दे सकते हैं। हमें सार्वजनिक और निजी अस्पतालों का एक नेटवर्क विकसित करने की आवश्यकता है जो NOTTO नीति के आधार पर अंगों को परस्पर साझा कर सकें और उत्तर प्रदेश राज्य में मृतक दाता प्रत्यारोपण कार्यक्रम को बढ़ा सकें।

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