CM Yogi Ka Bhasan: उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को महाकुंभ पर की जा रही बयानबाजी के लिए आड़े हाथों लिया। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि महाकुंभ जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन पर गलत बयान देकर वे करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान कर रहे हैं। महाकुंभ सनातन संस्कृति का प्रतीक है और इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

महाकुंभ: आस्था का महापर्व

महाकुंभ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत उदाहरण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बताया कि अब तक 56 करोड़ से अधिक श्रद्धालु महाकुंभ में स्नान कर चुके हैं, जो इस आयोजन की विराटता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महाकुंभ किसी सरकार का नहीं बल्कि सनातन संस्कृति का आयोजन है।

राजनीति बनाम आस्था

महाकुंभ को लेकर विपक्ष द्वारा लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा और अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे इस आयोजन की शुरुआत से ही इसके विरोध में थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने महाकुंभ को ‘मृत्यु कुंभ’ कहा था। वहीं, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने इसे ‘फालतू करार दिया और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भगदड़ में हजारों लोगों की मौत की बात कह दी.

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ऐसे बयान सनातन आस्था का अपमान करने के समान हैं। उनका मानना है कि महाकुंभ एक महान आयोजन है और किसी भी महान कार्य को तीन अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है: उपहास, स्वीकृति और विरोध। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सपा प्रमुख खुद गुपचुप तरीके से महाकुंभ पहुंचे और डुबकी भी लगाई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह आयोजन कितना महत्वपूर्ण है।

 

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