Lucknow: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा जातीय जनगणना कराए जाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक सकारात्मक शुरुआत बताया। अखिलेश ने कहा, यह केवल एक शुरुआत है, यहीं से सामाजिक न्याय की असली प्रक्रिया शुरू होती है। साथ ही उन्होंने अपील की, कि चुनावों में पारदर्शिता बनी रहे और जातीय जनगणना निष्पक्ष तरीके से कराई जाए, बिना किसी गड़बड़ी के।

अखिलेश यादव गुरुवार को मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला “इंडिया गठबंधन” के एजेंडे की जीत है। उन्होंने कहा, देश संविधान से चलता है, न कि किसी की मर्जी से। सरकार ने अब जातीय जनगणना के लिए सहमति जताई है, आगे चलकर निजी क्षेत्र की नौकरियों में भी इस पर बहस होगी।

उन्होंने श्रमिकों को बधाई दी और कहा कि देश के अधिकांश मजदूर पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग से आते हैं। भाजपा सरकार में इन मजदूरों को मशीन समझा जाता है, शोषण किया जा रहा है, और आउटसोर्सिंग तथा कमीशनखोरी ने हालात और खराब कर दिए हैं। इस मौके पर अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी में शामिल होने वाले नए नेताओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा, आज का दिन परिवर्तन का संकेत है। अब पीडीए हेल्पलाइन के बाद पीडीए डेटा सेंटर भी बनना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्होंने सरकारी वेबसाइट के आंकड़ों को सामने लाकर ग्राफ के जरिए तथ्यों को उजागर किया, तो सरकार घबरा गई और खुद सामने न आकर एक सेवानिवृत्त अधिकारी को आगे कर दिया।

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अखिलेश यादव ने लाल चंद गौतम का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि वह ऐसे नेता हैं जिनकी वजह से भाजपा को सड़कों पर उतरना पड़ा। उन्होंने सभी से अपील की कि भविष्य में ऐसा कोई कार्य न करें जिससे किसी की भावना आहत हो। साथ ही उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि क्या वह अपने कार्यकर्ताओं को यह सिखाएगी कि महापुरुषों का सम्मान कैसे किया जाता है? पूर्व सांसद अरविंद ने भी अपील की कि किसी राजनेता की तुलना किसी महापुरुष से न की जाए, क्योंकि वे दिव्य व्यक्तित्व होते हैं। बदरुद्दीन खान भी इस अवसर पर सपा में शामिल हुए।

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