UP: अयोध्या हाईवे पर दूसरे राज्यों के वाहनों से अवैध वसूली में लिप्त पाए गए एक दरोगा और तीन सिपाहियों को विभागीय जांच में दोषी ठहराया गया है। यह जांच रिपोर्ट ट्रैफिक मुख्यालय भेज दी गई है और जल्द ही इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जो न्यूनतम वेतन कटौती से लेकर बर्खास्तगी तक हो सकती है।

स्टिंग ऑपरेशन में हुआ भंडाफोड़:-
पिछले साल जून में तत्कालीन संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) उपेंद्र अग्रवाल को शिकायत मिली थी कि हाईवे पर तैनात ट्रैफिक पुलिस अवैध वसूली कर रही है। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक स्टिंग ऑपरेशन कराया, जिसमें एक बाहरी राज्य की बस में पुलिसकर्मी को कंडक्टर बनाकर बैठाया गया।

कमता तिराहे पर हुई वसूली:-
इस ऑपरेशन के दौरान कमता तिराहे पर पुलिसकर्मियों ने वाहनों को रोककर जबरन वसूली की। इस मामले में दरोगा उमेश सिंह और सिपाही शुभम कुमार, विवेक विशाल दुबे और सचिन कुमार के खिलाफ विभूतिखंड थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। विभागीय जांच एडीसीपी ट्रैफिक को सौंपी गई थी, जिसमें चारों दोषी पाए गए। इन पुलिसकर्मियों को रंगेहाथ पकड़ने के लिए एक जाल बिछाया गया, जिसमें एक पुलिसकर्मी ने वसूली की ऑडियो रिकॉर्डिंग कर ली। इस रिकॉर्डिंग को जांच में पुख्ता सबूत के रूप में शामिल किया गया।

हर वाहन से ली जाती थी 1000 रुपये की वसूली:-
जांच में सामने आया कि ये आरोपी खासकर निजी बसों, ट्रकों और डंपरों को निशाना बनाते थे। वे हर वाहन से 1000 रुपये की वसूली करते और भुगतान न करने पर वाहन सीज करने की धमकी देते थे। मजबूरी में चालक पैसे देने को मजबूर हो जाते थे। हालांकि, आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई। सूत्रों का कहना है कि जेसीपी के ट्रांसफर के बाद यह मामला दबा दिया गया था।

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