प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में करछना थाना क्षेत्र के इसौटा गांव में दलित युवक की हत्या के बाद भड़की हिंसा ने प्रशासन को सकते में डाल दिया है। घटना के बाद हालात बेकाबू हो गए, जिसमें कई वाहनों में आगजनी, पथराव और पुलिस पर हमले की घटनाएं सामने आईं। इसके जवाब में पुलिस और प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है।

क्या हुआ था?

दरअसल, इसौटा गांव में एक दलित युवक देवीशंकर की हत्या के विरोध में सांसद चंद्रशेखर आज़ाद जब पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें गांव में प्रवेश से रोक दिया। इसके बाद उनके समर्थकों ने सड़क पर प्रदर्शन किया जो हिंसक हो गया। भीड़ ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया और पुलिस बल पर पथराव किया।

गिरफ्तारियां और केस दर्ज

पुलिस ने अब तक 75 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें 54 नामजद और बाकी अज्ञात हैं।
करीब 600 से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा हिंसा में शामिल उपद्रवियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट खंगाले जा रहे हैं।

NSA और गैंगस्टर एक्ट लागू

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। डीसीपी यमुनापार विवेक चंद्र यादव ने कहा कि “कानून तोड़ने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।”

वाहन जब्ती और तलाशी अभियान

पुलिस ने अब तक 40 से अधिक बाइक और अन्य वाहन जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल उपद्रव में किया गया था। साथ ही आसपास के गांवों में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है और संदिग्धों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

भीम आर्मी की प्रतिक्रिया

सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने आरोप लगाया कि यह साजिश के तहत किया गया बवाल है और हिंसा में उनकी पार्टी या समर्थकों का कोई हाथ नहीं है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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