लखनऊ। धनतेरस के शुभ अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। त्योहारों के बीच हुए इस कार्यक्रम में जहां कई नेताओं ने सपा का दामन थामा, वहीं सपा से जुड़े लोकगायकों और कलाकारों ने “समाजवादी संगीत” भी प्रस्तुत किया। माहौल उत्सव जैसा था — पर अखिलेश यादव अपनी चिर-परिचित हाजिरजवाबी और राजनीतिक तीखेपन दोनों के साथ मंच पर नज़र आए।
हंसी-मज़ाक के बीच सियासी वार
अखिलेश यादव ने शुरुआत में त्योहारों में मिलने वाले उपहारों को लेकर हल्के फुल्के अंदाज़ में कहा- “इस बार धनतेरस-दीवाली पर बहुत गिफ्ट मिला है। हमने कहा कि अब ये सब कहाँ रखेंगे! वैसे जो मुकुट पहनाए जाते हैं, वो बस सम्मान के लायक ही होते हैं, उनमें सोना नहीं निकलता — हम तो कई बार गलाकर देख चुके हैं!” उनकी इस बात पर हॉल में मौजूद नेताओं और पत्रकारों के बीच ठहाके गूंज उठे।
योगी पर तंज, बिजली संकट पर हमला
मज़ाकिया माहौल के बाद अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर सीधे निशाने साधे। उन्होंने कहा कि “योगी आदित्यनाथ बिहार में स्टार प्रचारक नहीं, स्टार विभाजक बनकर गए हैं। बिहार की जनता ऐसे प्रचार को कभी स्वीकार नहीं करेगी।”याद रहे कि भाजपा ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए योगी आदित्यनाथ को अपने प्रमुख स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया है।
बिजली संकट के सवाल पर अखिलेश ने सरकार की नीतियों पर करारा प्रहार करते हुए कहा -“भाजपा से क्या उम्मीद करेंगे? फुस्स फुलझड़ी जैसी सरकार है ये। त्योहारों पर बिजली नहीं दे पा रहे। अब बिजली बनाई ही नहीं तो देंगे कहाँ से!”उन्होंने यह भी जोड़ा कि यूपी में जो बिजली व्यवस्था आज दिख रही है, वो समाजवादियों के कार्यकाल की देन है, “इन लोगों ने तो कुछ बनाया ही नहीं।”
कानपुर के अखिलेश दुबे केस पर चिंता
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कानपुर के अखिलेश दुबे मामले पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा -“अगर अखिलेश दुबे की संपत्ति पर बुलडोजर चला, तो पूरी सरकार गिर जाएगी। मुझे जानकारी मिली है कि नए अधिकारी इसलिए भेजे गए हैं ताकि कोई नई एफआईआर न दर्ज हो और सच्चाई दबा दी जाए।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को छुपाने में लगी है और इसमें आरोपी अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक संदेश
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से एक बात साफ है- अखिलेश यादव चुनावी मोड में हैं। जहाँ एक तरफ उन्होंने त्योहारों की खुशबू में हंसी का तड़का लगाया, वहीं दूसरी ओर भाजपा सरकार की नीतियों और प्रशासनिक रवैये को खुलकर चुनौती दी। उनका “स्टार प्रचारक नहीं, स्टार विभाजक” वाला बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।
