Chath Pooja:- आस्था, अनुशासन और पवित्रता का पर्व — छठ पूजा देशभर में पूरे श्रद्धा भाव से मनाया जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में सूर्य देव और छठी मइया की पूजा की जाती है। आज कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन लाखों श्रद्धालु घाटों पर स्नान कर डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतान की दीर्घायु की कामना करेंगे।
छठ पर्व का महत्व:-
छठ पूजा को सूर्य उपासना का सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक पर्व माना जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि प्रकृति और ऊर्जा के संतुलन का प्रतीक भी है। कहा जाता है कि सूर्य की अंतिम किरण यानी प्रत्यूषा देवी को अर्घ्य देने से मनुष्य के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
क्यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्घ्य:-
मान्यता के अनुसार, सूर्य देव की पत्नी प्रत्यूषा सायंकाल के समय उनके साथ रहती हैं। इसलिए छठ पूजा में शाम के वक्त दिया गया अर्घ्य प्रत्यूषा देवी को समर्पित माना जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमों के साथ डूबते सूर्य की आराधना करता है, उसे दोगुना पुण्य प्राप्त होता है — एक अस्त होते सूर्य की पूजा का, और दूसरा प्रत्यूषा देवी की कृपा का।
छठ पूजा में क्या करें:-
व्रती को प्रतिदिन स्नान-ध्यान कर तन और मन से पवित्र रहना चाहिए।
पूजा स्थल और प्रसाद बनाने की जगह को हमेशा साफ रखें।
छठ व्रत में मिट्टी के चूल्हे और नए सूप या टोकरी का प्रयोग शुभ माना जाता है।
सूर्य देवता को अर्घ्य देने के बाद ही कुछ ग्रहण करें।
ब्रह्मचर्य का पालन करें और जमीन पर ही विश्राम करें।
छठ पूजा में क्या न करें:-
पूजा में स्टील, प्लास्टिक या एल्यूमिनियम के बर्तनों का प्रयोग न करें।
लहसुन, प्याज जैसी तामसिक चीजों का सेवन न करें।
प्रसाद को बनाते या अर्घ्य देने से पहले उसका स्वाद न चखें।
व्रत के दौरान क्रोध, झगड़ा या विवाद से बचें।
किसी भी पूजन सामग्री को अपवित्र अवस्था में स्पर्श न करें।
आस्था और श्रद्धा का पर्व:-
छठ पूजा का हर चरण आत्मसंयम और श्रद्धा की परीक्षा है। व्रती सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों समय जल में खड़े होकर पूजा करते हैं, जो प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और जीवन के संतुलन का प्रतीक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि हर डूबते सूरज के बाद एक नई उम्मीद की सुबह जरूर आती है।
