लखनऊ: बिजली विभाग की मिलीभगत और ठेकेदारों की दबंगई ने उपभोक्ताओं के लिए चिंता और गुस्सा दोनों बढ़ा दिए हैं। ठाकुरगंज डीवीजन में सात उपभोक्ताओं के मीटर में संट पाए गए। उपभोक्ताओं ने वीडियो के माध्यम से स्पष्ट किया कि मीटर स्लो कर दिए गए थे। जांच में सामने आया कि यह काम ठेकेदार मोहम्मद आफताब और उनके कर्मचारी आफताब आलम द्वारा स्मार्ट मीटर सीलिंग के दौरान किया गया।
विवाद यह है कि जब उपभोक्ताओं ने मीटर में छेड़छाड़ का सबूत दिया, विभाग ने कार्रवाई करके मीटर पकड़ा और मोटा चालान थोप दिया। लेकिन जिसने मीटर स्लो करने वाली मशीन फिट की थी, उस ठेकेदार मोहम्मद आफताब और कर्मचारी आफताब आलम और उसकी कंपनी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह साफ़ दिखाता है कि बिजली विभाग को ठेकेदारों की पूरी जानकारी थी, फिर भी विभाग ने आंखें बंद रखीं।
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार मोहम्मद आफताब अपनी दबंगई और कुछ वकीलों की ताकत के बल पर विभाग में दबाव बना रहे हैं और अवैध लाभ उठा रहे हैं। जबकि आम उपभोक्ताओं पर विभागीय कार्रवाई तुरंत और कड़ी की जाती है, ठेकेदारों पर न तो कोई रोक है और न ही कोई सवाल।
इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिजली विभाग अब ठेकेदारों के हाथ बिक गया है? जनता अब मांग कर रही है कि ऐसे ठेकेदारों और उनके कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि विभागीय भ्रष्टाचार और मिलीभगत का सच सामने आए।
ठेकेदारों की दबंगई और विभाग एक तरफा कार्रवाई ने उपभोक्ताओं में नाराजगी फैला दी है। अगर इसी तरह मिलीभगत और दबाव चलता रहा, तो यह सिर्फ राजस्व का नुकसान ही नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का भी नुकसान होगा।
