इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनने के बाद भी अनुसूचित जाति (SC) के लाभ लेना संविधान के साथ धोखाधड़ी है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि राज्य में ऐसे सभी मामलों की जांच की जाए और चार महीने के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कोर्ट का सख्त रुख: धर्मांतरण के बाद नहीं मिलेगा SC आरक्षण
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है, तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देता है और उसे SC समुदाय के लिए प्रदान किए जाने वाले आरक्षण या सरकारी लाभ लेने का अधिकार नहीं रहता। कोर्ट ने कहा कि ईसाई बनकर भी SC लाभ लेना ‘‘फ्रॉड ऑन द कॉन्स्टिट्यूशन’’ यानी संविधान के साथ धोखा है।
महाराजगंज मामले से शुरू हुई कार्रवाई
यह मामला तब सामने आया जब महाराजगंज जिले के एक व्यक्ति ने ईसाई धर्म अपनाने के बावजूद अपने हलफनामे में स्वयं को हिंदू बताया और SC आरक्षण का लाभ उठाता रहा। हाईकोर्ट ने इसे गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए इस तरह के मामलों पर तत्काल लगाम लगाने की बात कही।
प्रशासनिक तंत्र को 4 महीने की डेडलाइन
हाईकोर्ट ने आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के:
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मुख्य सचिव
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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव
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सभी जिलाधिकारियों (DM)
को भेजते हुए निर्देश दिया है कि वे चार महीने के भीतर धर्म परिवर्तन कर चुके व्यक्तियों की पहचान करें और जिनके द्वारा SC लाभ लिया जा रहा है, उनके खिलाफ कार्रवाई करें। कोर्ट ने कहा कि शासन ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे भविष्य में किसी भी स्तर पर इस तरह की धोखाधड़ी न हो सके।
आरक्षण प्रणाली की पारदर्शिता पर जोर
इस फैसले को राज्य में आरक्षण प्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों द्वारा जातिगत लाभ लेने पर रोक लगती है, तो सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ सही पात्रों तक पहुँचेगा।
