लखनऊ: मजलिस-ए-उलमा-ए-हिन्द के जनरल सेक्रेटरी मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने ‘उम्मीद पोर्टल’ की खामियों, लगातार सर्वर डाउन रहने और हुसैनाबाद ट्रस्ट में RTI अदालत द्वारा ज़िला मजिस्ट्रेट पर लगाए गए जुर्माने जैसे अहम मुद्दों को लेकर आज अपने निवास स्थित जोहरी मोहल्ला में आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पत्रकारों से बातचीत की। मौलाना ने वक़्फ़ संपत्तियों के पंजीकरण के लिए बनाए गए ‘उम्मीद पोर्टल’ की ख़ामियाँ बताते हुए कहा कि यह पोर्टल ऐसे लोगों ने बनाया है जिन्हें वक़्फ़ के बारे में कोई जानकारी नहीं है। आए दिन इसमें बदलाव होते रहते हैं जिससे दिक्कतें पैदा हो रही हैं। मौलाना ने कहा कि खुद पोर्टल बनाने वालों को नहीं पता कि औक़ाफ़ के मसले क्या हैं और वक़्फ़ कितने प्रकार के होते हैं। कम से कम पोर्टल बनाने वालों को वक़्फ़ बोर्ड या औक़ाफ़ के विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए थी, लेकिन किसी से कोई सलाह नहीं ली गई, जिसका नुकसान औक़ाफ़ को हो रहा है। मौलाना ने कहा कि इमामबाड़े, मस्जिदें और कब्रिस्तान कहीं संयुक्त वक़्फ़ होते हैं और कहीं अलग-अलग।
जहाँ इमामबाड़ा, मस्जिद और कब्रिस्तान संयुक्त वक़्फ़ हैं, वहाँ पोर्टल पर पंजीकरण में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर इमामबाड़ा ग़ुफ़रानमाब के वक़्फ़ में कब्रिस्तान और मस्जिद भी शामिल हैं, लेकिन पोर्टल पर पंजीकरण के लिए अलग-अलग चढ़ाना होगा। मौलाना ने कहा कि पोर्टल पर एक वक़्फ़ के दस से अधिक खसरे दर्ज नहीं हो सकते, जबकि कई औक़ाफ़ में दस से अधिक खसरे हैं। एक मुतवल्ली के पास कई वक़्फ़ की ज़िम्मेदारी होती है, लेकिन पोर्टल पर एक मुतवल्ली सिर्फ एक ही वक़्फ़ का पंजीकरण कर सकता है। कुछ औक़ाफ़ ऐसे हैं जिनकी संपत्तियाँ विभिन्न ज़िलों में हैं, लेकिन आप केवल एक ज़िले की संपत्ति ही दर्ज कर सकते हैं तो क्या बाकी ज़िलों में मौजूद संपत्तियों को खत्म कर दिया जाएगा? मौलाना ने कहा कि सरकार को औक़ाफ़ के बारे में कुछ पता नहीं है सिर्फ वक़्फ़ संपत्तियों को तबाह करने के लिए यह क़ानून बनाया गया है। उन्होंने कहा कि फिर भी हमारी मांग है कि पंजीकरण की अवधि बढ़ाई जाए और पोर्टल को बेहतर बनाया जाए, क्योंकि पिछले छह दिनों से पोर्टल खुल नहीं रहा है और सर्वर लगातार डाउन है। उन्होंने बताया कि SIR पोर्टल पर पंजीकरण में कोई दिक़्क़त नहीं है और उसका सर्वर भी इस तरह डाउन नहीं हुआ है, जबकि SIR में शामिल लोगों की संख्या करोड़ों में है और वक़्फ़ संपत्तियाँ लगभग 8 लाख के आसपास हैं। ‘उम्मीद पोर्टल’ बनाने वाले या तो औक़ाफ़ की नौइयत से अनजान हैं या फिर जानबूझकर ऐसा पोर्टल बनाया गया है ताकि औक़ाफ़ को तबाह व बर्बाद कर दिया जाये।
मौलाना ने हुसैनाबाद ट्रस्ट में पारदर्शिता की कमी पर ज़िला मजिस्ट्रेट की भी आलोचना की उन्होंने कहा कि हुसैनाबाद ट्रस्ट के हिसाब और सवालों का जवाब न देने पर RTI अदालत ने ज़िला मजिस्ट्रेट पर जुर्माना लगाया है। यह एक बड़ी सफलता है क्योंकि इससे पहले कभी हुसैनाबाद ट्रस्ट की आय और हिसाब-किताब पर डीएम से इस तरह सवाल नहीं हुआ। अब तक यह दावा किया जाता था कि हुसैनाबाद ट्रस्ट एक निजी ट्रस्ट है, इसलिए उसका हिसाब-किताब नहीं दिया जाता था, जबकि यह बिल्कुल गलत है। हुसैनाबाद ट्रस्ट की कीमती चीज़ें गायब हैं जिनके बारे में डी.एम से पूछा गया है, लेकिन उन्होंने अभी तक जवाब नहीं दिया। अदालत ने उन्हें पेश होने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई में और भी बातें स्पष्ट होंगी। मौलाना ने कहा कि औक़ाफ़ की सुरक्षा के लिए हमारा आंदोलन जारी रहेगा और हुसैनाबाद ट्रस्ट का पूरा हिसाब डी.एम से लिया जाएगा।
