लखनऊ। योगी सरकार ने प्रदेशवासियों को बड़ी राहत देते हुए स्टांप ड्यूटी से जुड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब उत्तर प्रदेश में कॉमर्शियल और औद्योगिक संपत्तियों का बंटवारा (गिफ्ट डीड) मात्र ₹5,000 के स्टांप शुल्क पर किया जा सकेगा। इस फैसले को व्यापार, उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने वाला कदम माना जा रहा है।

कैबिनेट बैठक में लगी मुहर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद जानकारी देते हुए स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि यह व्यवस्था पहले केवल आवासीय और कृषि भूमि के लिए लागू थी, जिसे अब कॉमर्शियल और औद्योगिक संपत्तियों तक विस्तार दे दिया गया है।

परिवार में हर तरह की संपत्ति पर मिलेगी छूट
कैबिनेट ने परिवार के सदस्यों के बीच अचल संपत्ति के दान विलेख पर स्टांप शुल्क में दी जा रही छूट का दायरा बढ़ा दिया है। अब आवासीय, कृषि के साथ-साथ व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों के दान पर भी अधिकतम 5,000 रुपये ही स्टांप ड्यूटी देनी होगी। इसके अलावा संपत्ति के मूल्य का एक प्रतिशत निबंधन शुल्क देना होगा।

पहले कितना देना पड़ता था स्टांप शुल्क
अब तक शहरी क्षेत्रों में व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों पर सेल डीड की तरह सर्किल रेट का सात प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में पांच प्रतिशत तक स्टांप ड्यूटी देनी पड़ती थी। छूट न मिलने के कारण संपत्ति का पारिवारिक हस्तांतरण महंगा और जटिल हो जाता था। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे रियल एस्टेट और औद्योगिक क्षेत्र में कानूनी और पारदर्शी लेनदेन को प्रोत्साहन मिलेगा।

निवेश अनुकूल प्रदेश की ओर एक और कदम

योगी सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है, जिनसे उत्तर प्रदेश को देश का सबसे निवेश-अनुकूल राज्य बनाने की दिशा में मजबूती मिल रही है। स्टांप ड्यूटी में यह कटौती भी उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस फैसले को लेकर आवश्यक अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी, जिसके बाद नई दरें प्रभावी हो जाएंगी।

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