लखनऊ/अमेठी। अमेठी जनपद के जगदीशपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) एक बार फिर सुर्खियों में है। स्वास्थ्य सेवाओं में कथित अनियमितताओं, पुराने संवेदनशील मामलों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवालों ने पूरे प्रकरण को गंभीर बना दिया है। मामला अब उपमुख्यमंत्री स्तर तक पहुंच चुका है, जिससे निष्पक्ष जांच की उम्मीद बढ़ गई है।
भारतीय जनता पार्टी ओबीसी मोर्चा से जुड़े सुरेश यज्ञ सैनी द्वारा चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को सौंपे गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि सीएचसी में तैनात कुछ चिकित्सक और कर्मचारी नियमित रूप से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं रहते, इसके बावजूद उपस्थिति पंजिका में हाजिरी दर्ज कर वेतन लिया जा रहा है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायत में कई डॉक्टरों और कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जिन पर उपस्थिति रजिस्टर में गड़बड़ी, फर्जी हस्ताक्षर और बिना कार्य के वेतन आहरण जैसे आरोप लगाए गए हैं। वर्ष 2026 के रिकॉर्ड में अवकाश के दिनों में भी उपस्थिति दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।
इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ब्लड स्टोरेज यूनिट लंबे समय से बंद है, आरओ सिस्टम खराब है और एक्स-रे जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मरीजों को बाहर जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
प्रकरण में प्रशासनिक नियुक्तियों पर भी सवाल उठे हैं। अधीक्षक पद पर तैनाती को लेकर नियमों के अनुपालन पर संदेह जताया गया है, जबकि एक चिकित्साधिकारी के करीब 12 वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात रहने का मुद्दा भी चर्चा में है, जो स्थानांतरण नीति के विपरीत बताया जा रहा है।
इस बीच, एक दिव्यांग महिला से जुड़ा पुराना मामला भी फिर चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में आरोप लगाया गया था कि अल्ट्रासाउंड जांच के दौरान महिला को उचित सुविधा नहीं दी गई और उसे जमीन पर घसीटते हुए ले जाया गया। इस मामले में गठित जांच समिति की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है, जिससे सवाल और गहराते जा रहे हैं।
शिकायतकर्ता ने उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी है। बताया जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सीएमओ का पक्ष आना बाकी है। ऐसे में अब सभी की निगाहें उच्च स्तरीय जांच पर टिकी हैं, जिससे सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
