लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन और KGMU की संयुक्त समिति ने महिला आयोग की उपाध्यक्ष अर्पणा यादव के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर FIR दर्ज नहीं की गई, तो इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर OPD सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।

संयुक्त समिति ने लगाए गंभीर आरोप

KGMU की संयुक्त समिति ने अपने बयान में कहा कि महिला आयोग की उपाध्यक्ष अर्पणा यादव की कार्यप्रणाली से सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा है। समिति का आरोप है कि उनके साथ आए कुछ उपद्रवियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अभद्रता और दुर्व्यवहार किया। समिति के अनुसार, घटना को 72 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक संबंधित मामले में कोई FIR दर्ज नहीं की गई, जिससे चिकित्सकों और कर्मचारियों में भारी रोष है।

24 घंटे का अल्टीमेटम, OPD ठप करने की चेतावनी

संयुक्त समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो

  • इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर

  • सभी OPD सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।

इस निर्णय से राजधानी लखनऊ समेत आसपास के जिलों से इलाज के लिए आने वाले हजारों मरीजों पर असर पड़ सकता है।

डॉक्टरों और स्टाफ में आक्रोश

KGMU के डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय की गरिमा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बदसलूकी की गई, लेकिन कार्रवाई न होना न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। संयुक्त समिति ने संकेत दिए हैं कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और उग्र किया जा सकता है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट की आशंका

KGMU उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान है। यहां OPD सेवाएं बाधित होने की स्थिति में मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते प्रशासन को हस्तक्षेप कर समाधान निकालना चाहिए।

आगे की रणनीति पर नजर

अब सबकी निगाहें पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। अगले 24 घंटे में FIR दर्ज होती है या नहीं, इसी पर तय होगा कि KGMU में स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रहेंगी या प्रदेश को एक बड़े चिकित्सा संकट का सामना करना पड़ेगा।

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