प्रयागराज। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेले से आज अपना अनशन समाप्त कर दिया और बिना स्नान किए ही मेला क्षेत्र से विदा ले ली। उनके इस फैसले को आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माघ मेले में लंबे समय से चल रहे अपने सत्याग्रह और अनशन के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रस्थान से पहले कहा, “बिना स्नान किए यहां से विदा ले रहे हैं। न्याय की परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती। आज हम यहां से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज और कुछ प्रश्न छोड़कर जा रहे हैं।”
उनके इस वक्तव्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं और अनुयायियों को भावुक कर दिया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना था कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और सत्य के पक्ष में है, जो आगे भी जारी रहेगा।
अनशन के दौरान उठाए अहम मुद्दे
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने अनशन के दौरान धार्मिक मर्यादाओं, परंपराओं और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी विरोध के लिए नहीं, बल्कि आत्ममंथन और सत्य की स्थापना के लिए है।
समर्थकों में भावुक माहौल
उनके माघ मेले से प्रस्थान के समय बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु और समर्थक मौजूद रहे। कई लोगों ने इसे एक शांत लेकिन सशक्त संदेश के रूप में देखा कि धर्म का मार्ग केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि विवेक और न्याय से जुड़ा होता है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संकेत दिए कि आने वाले समय में वे अपने विचारों और सवालों को समाज के सामने और व्यापक रूप से रखेंगे।
