Avimukteshwaranand Controversy: प्रयागराज माघ मेले के दौरान प्रशासन से हुए विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि माघ मेले में उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया और 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा गया था।

शंकराचार्य ने दावा किया कि उन्होंने तय समय के भीतर प्रशासन को अपना जवाब सौंप दिया, लेकिन अब तक उस पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई। उनका कहना था कि यदि जवाब गलत होता, तो प्रशासन उसे खारिज करता। इससे साफ है कि उनकी बात सही पाई गई। प्रेस वार्ता के दौरान शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि जब उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया, तो अब सरकार को भी अपने हिंदू होने का प्रमाण देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व केवल भाषणों या भगवा वस्त्रों से सिद्ध नहीं होता, बल्कि इसके लिए गौ-सेवा और गौ-संरक्षण आवश्यक है।

सीएम योगी से मांगा हिंदू होने का प्रमाण, 40 दिन का अल्टीमेटम:-

शंकराचार्य ने कहा कि हिंदू होने की पहली शर्त गौ-रक्षक होना है और इसी आधार पर सरकार से प्रमाण मांगा जा रहा है। शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी को 40 दिनों का समय देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में वे अपने कार्यों से यह सिद्ध नहीं कर पाते, तो उन्हें “छद्म हिंदू” और “ढोंगी” माना जाएगा। गौ-संरक्षण को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए शंकराचार्य ने कहा कि गौ-मांस के निर्यात से जुड़ी नीतियों पर भी जवाब देना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि गौ-माता के मांस को भैंस का मांस बताकर निर्यात किया जा रहा है और ऐसे में रामराज्य की बात करना विरोधाभास है।

शंकराचार्य ने स्पष्ट मांग रखी कि 40 दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश में गौ-माता को ‘राज्य माता’ घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि आज से 40 दिन की गिनती शुरू हो चुकी है और यदि 10 मार्च तक यह मांग पूरी नहीं हुई, तो संत-महंत और आचार्य लखनऊ में एकत्र होकर आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को महाराष्ट्र और नेपाल से सीख लेने की सलाह दी और कहा कि देश से होने वाले गौ-मांस निर्यात का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश से जुड़ा है, जो सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा करता है। शंकराचार्य ने कहा कि यह मुद्दा अब माघ मेले या स्नान तक सीमित नहीं है, बल्कि असली और नकली हिंदुत्व की पहचान का विषय बन चुका है।

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