महोबा: उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के महोबा दौरे के दौरान उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई, जब चरखारी से भाजपा विधायक बृजभूषण उर्फ गुड्डू राजपूत और उनके समर्थकों ने मंत्री के काफिले को बीच रास्ते में रोक लिया। यह घटना उस समय हुई जब मंत्री एक कार्यक्रम में शामिल होकर वापस लौट रहे थे। जानकारी के अनुसार, मंत्री शहर के रामश्री महाविद्यालय में आयोजित युवा उद्घोष कार्यक्रम में शामिल होने के बाद कलक्ट्रेट मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान पहले से मौजूद विधायक और बड़ी संख्या में समर्थकों ने सड़क पर वाहन खड़े कर काफिले को रोक दिया। उनका आरोप था कि जल जीवन मिशन के तहत खोदी गई सड़कों की हालत बेहद खराब है और कई गांवों में अब तक पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है।

कार्यकर्ताओं और सुरक्षा कर्मियों में हुई झड़प:-
काफिला रुकते ही मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी बहस के साथ धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। हालात बिगड़ते देख प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले को संभालने का प्रयास किया।
मंत्री को उतरकर करनी पड़ी बातचीत:-
स्थिति सामान्य करने के लिए जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह खुद अपने वाहन से नीचे उतरे। इसके बाद मंत्री और विधायक के बीच खुलकर बातचीत हुई, जिसमें दोनों पक्षों के बीच कहासुनी भी हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह विरोध सुनियोजित प्रतीत हो रहा था, क्योंकि बड़ी संख्या में समर्थक पहले से ही मार्ग पर मौजूद थे।
प्रशासन ने कराया रास्ता खाली:-
मौके पर पहुंचे सीओ सदर अरुण कुमार सिंह और एसडीएम शिवध्यान पांडेय ने स्थिति को नियंत्रण में लिया। प्रशासन ने समर्थकों को सड़क से हटवाया और काफिले को आगे बढ़ाया। इस दौरान कई ग्राम प्रधान भी विधायक के साथ मौजूद थे, जिन्होंने सड़कों की बदहाली और पानी की समस्या को गंभीर बताया।
मंत्री का आश्वासन, लापरवाही पर होगी कार्रवाई:-
विरोध के दौरान मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने विधायक से कहा कि जहां भी शिकायत है, वे खुद मौके पर जाकर जांच करने को तैयार हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर किसी गांव में सड़कें खराब मिलीं या लापरवाही सामने आई, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, यहां तक कि निलंबन भी किया जा सकता है। बातचीत के बाद मंत्री विधायक को अपनी गाड़ी में बैठाकर आगे बढ़े। इसी दौरान कुछ समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच फिर से बहस हो गई, जिसे बाद में शांत कराया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि काफिला केवल समस्याओं को सामने रखने के उद्देश्य से रोका गया था। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन इस घटनाक्रम ने जिले की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
